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इंदौर: अब PMC Bank में पांच हजार लोगों के लगभग 40 करोड़ रुपए आए उलझन में, जमाकर्ताओं में आक्रोश

इंदौर: पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक का बड़ा घोटाला सामने आने के बाद महाराष्ट्र में इस बैंक को 6 महीनों के लिए बैन कर दिया हैं। जिसके बाद लोग अपना ही पैसा लेने के लिए सड़कों पर आ गए हैं। लोग अपना पैसा सुरक्षित रखने के लिए बैंकों में जमा करते हैं। यहीं सोचते है की हमारा पैसा बैंक में सुरक्षित है, लेकिन अब आपका ही पैसा आपका नहीं रहा हैं। अब आपको अपना पैसा लेने के लिए बैंक से भीख मांगना पड़ रहीं हैं। 

बता दे कि महाराष्ट्र के बाद अब इंदौर के पंजाब एंड महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव (पीएमसी) बैंक की हालत खस्ता ही चुकी हैं। इंदौर के बैंक में भी करीब पांच हजार लोगों के लगभग 40 करोड़ रुपए फंस गए हैं। अब इस बैंक से भी जमाकर्ताओं को उनका पैसा नहीं मिल पा रहा हैं। वहीं, कुछ दिनों में दीपावली का त्योहार आ रहा है और ऐसे में लोगों को पैसों की सख्त जरूरत हैं। लेकिन PMC Bank का पूरा कारोबार उथल-पुथल हो चुका हैं। 

जमाकर्ताओं को अपना ही पैसा निकलने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। इसी के चलते शनिवार को चिंतित जमाकर्ता भंवरकुआं के पास बैंक की अशोक नगर शाखा पहुंचे। जहां उन्होंने प्रबंधक से कहा कि बैंक ने हमारा जमा पैसा नहीं लौटाया तो आंदोलन किया जाएगा।

जानकरी के अनुसार, इंदौर में PMC Bank की अशोक नगर और विजय नगर में दो शाखाएं हैं। अशोक नगर शाखा में ट्रांसपोर्टरों के लाखों-करोड़ों रुपए जमा हैं। जमा पैसे के लिए मध्य प्रदेश ट्रांसपोर्ट महासंघ की ओर से जमाकर्ताओं ने शनिवार को अशोक नगर शाखा के प्रबंधक ज्ञानेश्वर नागर को पत्र सौंपते हुए मांग की कि मुंबई में बैंक के डायरेक्टर से बात करके हमें दीपावली से पहले हमारा पैसा लौटाया जाए। हम नहीं चाहते कि जिस तरह मुंबई में आंदोलन हुआ, ऐसा इंदौर में भी हो। 

गौरतलब है कि बैंक में हुए घोटाले के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंक से राशि निकालने पर छह महीने की पाबंदी लगाई हैं। इसके साथ ही जरूरतमंद जमाकर्ताओं के लिए अधिकतम 40 हजार रुपए की राशि निकालने की अनुमति दी हैं। लेकिन घबराए हुए जमाकर्ता अपना पूरा पैसा किसी भी हाल में निकालना चाहते हैं। जमाकर्ताओं का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के विश्वास पर खाते खोलते हैं, लेकिन पीएमसी बैंक ने विश्वासघात किया हैं। 

जमाकर्ताओं ने कहा कि हम आरबीआई और केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को भी अपनी समस्या लिख रहे हैं।
 

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