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आखिर इंदौर में क्यों बढ़ रही है कोरोना संक्रमितों की संख्या?

इंदौर / गरिमा श्रीवास्तव :- इंदौर में आखिर कोरोनावायरस के मरीज क्यों बढ़ रहे हैं?

यह जो जनसम्पर्क विभाग विज्ञापन बांट बाँट कर TV पर सिर्फ यह दिखा रहा है कि  कोरोना मरीज ठीक होकर आ रहे हैं..इंदौर में 63 मौत,उज्जैन में 20 मौत,मौत के बाद विधवा विलाप,अनाथ बच्चे,बिलखते माँ बाप भी दिखाइए लोगो को लग रहा है सब ठीक ठाक है इसलिए बेफिजूल घूम रहे हैं,पालदा क्षेत्र में तो factory भी खुल गयी है जहाँ मैदा मिल,दाल मिल के मालिक मुनाफे की आस में इंदौर की जनता से खिलवाड़ कर रहे है,आखिर कर्फ्यू के बाबजूद 10 हजार से ज्यादा लोग सड़कों पर क्यो है?

सरकार चाहे तो Mobile towers से PSTN डाटा निकाल ले जो Mobile नम्बर एक से ज्यादा Towers के signal कैच कर रहे है मतलब की वह लोग Movement कर रहे है,इसतरह technology की मदद से Lockdown/curfew में घूमने वालो का विवरण पुलिस के पास होगा, औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली खपत का अध्य्यन करे फैक्ट्री मीटर चेक करें विगत 35 दिन में अगर 500 यूनिट से ज्यादा खपत हुई है मतलब फैक्टरियां चालू हैं।खुफिया विभाग को सक्रिय कर प्रत्येक थाना क्षेत्र में Lockdown curfew कितना प्रभावी है उसकी जांच रिपोर्ट बुलवाएं।

38 दिन के Curfew के बावजूद केस बढ़ रहे है तो उसके मात्र कारण है

(1)Lockdown का सख्ती से पालन नही हो रहा

(2)Contact tracing नही हो रही है

(3)Asymptomatic carriers की Random sampling नही हो रही

(4)लोग न तो मास्क लगा रहे हैं न ही Social Distancing का पालन कर रहे है

(5)सम्पल देने के 48 घण्टे के अंदर test report नही आ रही

(6)Suspected लोग Home isolation का पालन नही कर रहे है

(7)मजदूर,निम्न मध्यमवर्ग तक राशन नही पहुंच रहा वह राशन और रोजगार की तलाश में इधर उधर भटक रहे है

(8)Yellow श्रेणी के अस्पतालों में समय पर जांच होकर Negative रिपोर्ट आने पर उन्हें अस्पताल से Discharge किया जाए

(9)घरों में काम करने वाली बाइयाँ आ रही है 1 गृह सहायिका औसतन 4/6 घरों में काम करती हैं

(10)कॉलोनी के अंदर लोग Evening morning walk कर रहे है,

(11)शहर में 1% लोग भी मास्क पहनकर नही घूम रहे,चेकिंग सिर्फ मुख्य मार्ग पर हो रही है। 

 इंदौर इन दिनों भारत का वुहान हो गया है. मरीजों के बढ़ते आंकड़े के बीच स्थिति बिगड़ती ही जा रही है. और वही ऐसे भी बातें सामने आई है कि इंदौर द्वारा आंकड़े को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है. बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर इंदौर ही स्थिति कब तक इसी प्रकार बनी रहे? 

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