राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर पेगासस मामले को लेकर कसा तंज, कहा- केंद्र सरकार दे रही हैं लोगों को धोखा

- पेगासस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने जारी किये आदेश
- जाँच के लिए बनाई तीन सदस्यों की कमेटी
अंजली कुशवाह: इजराइली स्पाइवेयर पेगासस के जरिए जासूसी का विवाद और भी बढ़ता हुआ नजर आ रहा हैं. इस मामले को लेकर बुधवार को विपक्ष दल के कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जोरदार निशाना साधा हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा हैं कि आज सुप्रीम कोर्ट ने हमारे सवालों पर मुहर लगा दी है. यह पूरी तरह से लोकतंत्र पर हमला है. हमने संसद सत्र के दौरान तीन सवाल पूछे थे. पहला- पेगासस को किसने खरीदा?, दूसरा-इसे भारत कौन लाया?, तीसरा- क्या इसका डेटा किसी और देश के पास भी है? उन्होंने कहा कि क्या PM को भी जासूसी का डेटा मिल रहा था.
लोगों को धोखा दे रही हैं केंद्र सरकार
मिली जानकारी के अनुसार राहुल गांधी ने शाम को मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे मामले में केंद्र सरकार लोगों को धोखा दे रही है. गृह मंत्रालय को इसकी जानकारी है, लेकिन सरकार कुछ भी बताना नहीं चाहती.
बता दें कि यह पहला मौका नहीं हैं जब इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाये हैं इससे पहले राहुल गांधी जासूसी मामले में गृहमंत्री अमित शाह से इस्तीफा मांग चुके है.
क्या हैं सुप्रीम कोर्ट के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पेगासस जासूसी कांड में तीन सदस्यों की कमेटी बनाई. इस कमेटी में अध्यक्ष जस्टिस आरवी रवींद्रन के साथ पूर्व IPS अफसर आलोक जोशी और डॉक्टर संदीप ओबेरॉय शामिल हैं. कोर्ट ने इस कमेटी से कहा है कि पेगासस से जुड़े आरोपों की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट को सौंपे. 8 हफ्ते बाद फिर इस मामले में सुनवाई की जाएगी.
जानिये क्या है पेगासस ?
पेगासस एक स्पाइवेयर है. स्पाइवेयर यानी जासूसी या निगरानी के लिए इस्तेमाल होने वाला सॉफ्टवेयर हैं. इसके जरिए किसी फोन को हैक किया जा सकता है. हैक करने के बाद उस फोन का कैमरा, माइक, मैसेजेस और कॉल्स समेत तमाम जानकारी हैकर के पास चली जाती है. इस स्पाइवेयर को इजराइली कंपनी NSO ग्रुप ने बनाया है.
केंद्र सरकार का नाम इस मामले में सामने आने का कारण ये हैं कि पेगासस को बनाने वाली कंपनी का कहना है कि वो किसी निजी कंपनी को यह सॉफ्टवेयर नहीं बेचती है, बल्कि इसे केवल सरकार और सरकारी एजेंसियों को ही इस्तेमाल के लिए देती है. इसका मतलब है कि अगर भारत में इसका इस्तेमाल हुआ है, तो कहीं न कहीं सरकार या सरकारी एजेंसियां इसमें शामिल हैं.




