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Nirbhaya Case: राष्ट्रपति कोविंद ने की 48 घंटे में दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका ख़ारिज

नई दिल्ली: दोषी पवन गुप्ता की दया याचिका राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ख़ारिज कर दी है। पवन के पास फांसी से बचने का यह आखिरी ऑप्शन था। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन ख़ारिज करने के बाद पवन ने राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी थी। जिसकी वजह से कोर्ट ने 3 मार्च को होने वाली फांसी टाल दी थी।

पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करते हुए फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील करने का निवेदन किया था। जिसको सुप्रीम कोर्ट में ख़ारिज कर दिया गया था। जस्टिस एन वी रमना की 5 जजों की अध्यक्षता वाली पीठ ने ख़ारिज करते हुए कहा था कि सजा पर दोबारा विचार करे का कोई सवाल ही नहीं उठता।

सिस्टम अपराधियों का मददगार- आशा देवी (निर्भया की माँ)
निर्भया की माँ आशा देवी ने तीसरी बार फांसी टलने पर निराशा जाहिर की थी। उन्होंने कहा था कि- सजा पर बार-बार रोक लगना सिस्टम की नाकामी दिखाता है। हमारा पूरा सिस्टम ही अपराधियों का मददगार है।

आप आग से खेल रहे- कोर्ट
पवन ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा क्यूरेटिव पिटीशन ख़ारिज होए के बाद दया याचिका दाखिल की थी। इसके बाद दोषी के वकील ए पी सिंह ने ट्रायल कोर्ट में दया याचिका लंबित होने के बाद फांसी पर रोक लगाने के मांग की थी। कोर्ट ने आखिरी दौर में दया याचिका और क्यूरेटिव पिटीशन दायर करे पर पवन गुप्ता के वकील को फटकार लगाई थी। न्यायधीश ने कहा- “किसी की तरफ से एक भी गलत कदम उठाया, तो नतीजे आपके सामने होंगे। अदालत ने सिंह से कहा- आप आग से खेल रहे हैं। चेत जाइए।”

आपको मालूम हो कि 12 दिसंबर 2012 में परमेडिकल की छात्रा के साथ 6 लोगों ने बस में दरिंदगी की थी। जिसके बाद सिंगापुर में इलाज़ के दौरान 26 दिसंबर को उसकी मौत हो गई थी। 6 में से एक आरोपी के नाबालिग होने की वजह से उसे बाल सुधार गृह में 3 साल रखे के बाद छोड़ दिया गया था। मुख्य दोषी राम सिंह ने ट्रायल के दौरान तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। बचे चार आरोपियों की फांसी की सजा बरकार है। जिसे 3 मार्च को तीसरी बार टाला गया था।   

 

 

       

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