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तो क्या गिर जाएगी "शिव राज" सरकार?? बन रही है ये स्थिति, अटकलें हुई तेज़, बीजेपी में मचा हड़कंप….!  

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर कैबिनेट गठन को लेकर दबाव बना हुआ हैं। सीएम पद की शपथ लेने के बाद से ही वो अकेले सरकार चला रहे हैं। इस सियासी उठापठक के बीच अब खबर है कि केंद्रीय भाजपा से एक दो दिन में चर्चा होने की संभावना हैं। दिल्ली से हर झंडी मिलते ही कैबिनेट का गठन होगा। वहीं इन सब के बीच सूत्रों से खबर मिली है कि कोरोना संकट को देखते हुए फिलहाल सीएम अपनी टीम को छोटा रखेंगे, बाद में कैबिनेट विस्तार होगा।

इधर, ये खबर आते ही सपा-बसपा के तीन और चार निर्दलीय विधायकों के शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल होने की संभावना न के बराबर हो गई हैं। 

बता दे कि ये सब वोही विधायक है जिन्होंने शिवराज सरकार से पहले कमलनाथ सरकार को समर्थन दिया था। जहां इन सब को आश्वासन दिया गया था कि उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा लेकिन इन सभी की उम्मीदों पर पानी फिर गया। हालांकि वारासिवनी से विधायक प्रदीप जायसवाल एक मात्र ऐसे निर्दलीय थे जिन्हें मंत्री बनाया गया था। 

वहीं, जब ऑपरेशन लोटस संपन्न हुआ और कमलनाथ की सरकार गिरी वैसे ही इन सभी ने पाला बदल लिया और भाजपा को समर्थन दे दिया।

अब कुल मिलाकर सपा बसपा और निर्दलीय विधायकों का भविष्य वही लगता है जो कमलनाथ सरकार में था। बल्कि पिछली सरकार मे मंत्री रह चुके प्रदीप जायसवाल भी इस बार नाउम्मीद होगे, यह भी तय हैं। 

दरअसल, इस समय सीएम शिवराज के सामने बड़ी दिक्कत खड़ी हुई हैं। चुकी सिंधिया समर्थक 10 विधायकों को मंत्री बनाया जाना हैं। इसके अलावा बीजेपी के भी कई अनुभवी और दिग्गज नेता मंत्री बनने की आस लगाए बैठे हैं। ऐसे में इन निर्दलीयों को शिवराज मंत्रिमंडल में जगहें मिले इसकी संभवाना बेहद कम हैं। 

बताते चले कि शिवराज सरकार के पास फिलहाल बहुमत हैं। लेकिन अभी 24 सीटों पर उपचुनाव भी होने हैं। हालांकि बीजेपी को पूरा विश्वास है कि आने वाले उपचुनाव में से वह इतनी सीटे तो हासिल कर ही लेगी कि आसानी के साथ विधानसभा में अपने दम पर सरकार चला सके। लेकिन अगर बीजेपी इन चुनाव में ज़्यादा सीटे हासिल नहीं कर पाई तो एक बार फिर इन निर्दलीयों की भूमिका बेहद अहम हो जाएगी। 

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