शराबबंदी पर बवाल : उमा भारती बोली, राजस्व जाए भाड़ में, बस शराब बंद करो

शराबबंदी पर बवाल : उमा भारती बोली, राजस्व जाए भाड़ में, बस शराब बंद करो

मध्यप्रदेश/ग्वालियर - मध्यप्रदेश में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने दोबारा  शिवराज सरकार के घेराव किया हैं। उमा भारती ने दलील दी कि कोरोना में साबित हो गया शराब नहीं पीने से एक भी आदमी नहीं मरा, जैसे ही दुकानें खुलीं लोग मरना शुरू हो गए। इसका मतलब है कि शराब मृत्यु की कारक है शराब बंद करना मृत्यु का कारण नहीं हैं। 

उमा भारती ने कहा कि वो शराबबंदी नशामुक्ति अभियान चलाएंगी। यह मेरा सपना है जो जल्द पूरा भी होगा। वो यहां तक कह गयीं कि शराबी भले ही भूखा मर जाए लेकिन शराब बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शराबबंदी में स्वचेतना का जागरण होना चाहिए। मैं शिवराज और वीडी शर्मा से सहमत हूं और वह मुझसे सहमत हैं। 

उमा भारती का मानना है शराबखोरी से महिलाएं ज्यादा पीड़ित होती हैं। शराब पीकर मारपीट-अत्याचार और ज़ुल्म उन्हीं पर ढाए जाते हैं। दूसरी विचारणीय बात ये है कि गरीब वर्ग के लोग ही दो नंबर यानि अवैध शराब पीते हैं। अवैध शराब से राजस्व भी नहीं मिलता। राजस्व सिर्फ एक नंबर की शराब से मिलता हैं। वो यहां तक कह गयीं कि मैंने शिवराज जी से कहा है जैसे ही राजस्व का रास्ता निकल आये आप शराबबंदी और नशाबंदी दोनों की तरफ आइए। मुझे शराब से इतनी नफरत है कि मेरा बस चले तो लोग भूखों मरते हैं तो मर जाएं राजस्व गया भाड़ में बस शराब बंद करो। 

उमा ने सलाह देते हुए कहा कि सरकार को यह करना है नियम विरुद्ध दुकानें न खोली जाएं। आबकारी नियमों का पालन किया जाए, क्योंकि दो नम्बर की जो शराब बनती है वही अधिकतर जहरीली होती हैं। वह पूरी तरह से बंद हो।