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अतिथि विद्वानों की समस्याएं गंभीर,शीघ्र निराकरण हमारी प्राथमिकता:- गोपाल भार्गव

अतिथि विद्वानों की समस्याएं गंभीर,शीघ्र निराकरण हमारी प्राथमिकता-गोपाल भार्गव
फॉलेन आउट अतिथि विद्वानों को तत्काल व्यवस्था में ले सरकार-अतिथि विद्वान

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव :- प्रदेश के महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों ने सरकार के सभी मंत्रियों से मिलने का सिलसिला तेज़ कर दिया है इसी तारतम्य में कद्दावर कैबिनेट मंत्री गोपाल भार्गव से विद्वानों का प्रतिनिधि मंडल राजधानी में मिला।विद्वानों ने भार्गव का अभिनंदन स्वागत किया और अपनी पीड़ा व्यक्त की।संघ के अध्यक्ष वा मोर्चा के संयोजक डॉ देवराज सिंह ने बताया कि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि हम सब आपके संघर्ष को जानते हैं और आपके आंदोलन में आए थे आपका नियमितीकरण करना हमारी सरकार की प्राथमिकता में शामिल है,जल्दी ही निर्णय लिया जाएगा।प्रतिनिधि मंडल में भगवान दास धार्मिक,शशांक शर्मा भी शामिल रहे..
फॉलेन आउट हुए अतिथि विद्वानों की रूकी हुई लिस्ट जारी करने में देर क्यों ?
आज पूरा प्रदेश ही नहीं बल्कि देश जानता है कि अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण मुद्दे पर ही शिवराज सरकार सत्ता में आई हैं।मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय ने सूबे के मुखिया से गुहार लगाई है कि रूकी हुई लिस्ट तत्काल सरकार जारी करें जिससे लगातार हो रही फॉलेन आउट अतिथि विद्वानों की आत्महत्या रुके और सरकार की बेहतरीन छवि विद्वानों वा जनता के बीच जाए लगभग 1800 बाहर हुए विद्वान नहीं बल्कि 1800 परिवार के अति संवेदनशील मुद्दे पर तत्काल निर्णय लेने की आवश्यकता है।
मप्र सरकार के मुखिया व मंत्रियों को नैतिक दायित्व है अतिथि विद्वानों की सेवा बहाली व नियमितीकरण
मोर्चा के प्रांतीय प्रवक्ता डॉक्टर मंसूर अली ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए सरकार के सभी मंत्रियों से अनुरोध किया है कि अब देरी उचित नहीं है सरकार जिस मुद्दे पर बनी है उसको प्राथमिकता से लेते हुए प्रदेश के महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण का फैसला करना चाहिए क्योंकि हमारे आंदोलन में खुद सूबे के मुखिया शिवराज सिंह चौहान, गोपाल भार्गव ,नरोत्तम मिश्रा जैसे कद्दावर मंत्री आ चुके थे,सरकार आते ही पहली प्राथमिकता में अतिथि विद्वानों को नियमित करने की प्रतिबद्धता ज़ाहिर की थी।अब सरकार उनकी है इस तरफ़ ध्यान दें…

 अतिथि विद्वान संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष ने कहा कि लगातार फॉलन आउट अतिथि विद्वान आत्महत्या कर रहे हैं क्योंकि उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है.. जल्द से जल्द नियमितीकरण कर सरकार आत्महत्या को रोके. 

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