पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज Parthiv Patel ने क्रिकेट को कहा अलविदा, लिया सभी फॉर्मेस से संन्यास

पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज Parthiv Patel ने क्रिकेट को कहा अलविदा, लिया सभी फॉर्मेस से संन्यास

नई दिल्ली - बुधवार को भारत के पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल (Parthiv Patel) ने अपने 18 साल के क्रिकेट करियर से संन्यास ले लिया हैं। पार्थिव ने सोशल मीडिया के जरिये बताया कि वह आज क्रिकेट के सभी फॉर्मेस से संन्यास ले रहे हैं। 

रिटायरमेंट का ऐलान करते हुए पार्थिव पटेल ने अपने टि्वटर पर पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष सौरव गांगुली का शुक्रिया अदा किया, जिनकी कप्तानी में पटेल ने डेब्यू किया था। ''मैं आज क्रिकेट के सभी प्रारूपों से विदा ले रहा हूं। भारी मन से अपने 18 साल के क्रिकेट के सफर का समापन कर रहा हूं.'' पार्थिव ने कहा, ''मुझे सुकून है कि मैंने गरिमा, खेल भावना और आपसी सामंजस्य के साथ खेला। मैंने जितने सपने देखे थे, उससे ज्यादा पूरे हुए।  मुझे उम्मीद है कि मुझे याद रखा जाएगा। 

पार्थिव पटेल ने लिखा, ''मैं खास तौर पर दादा का ऋणी हूं, मेरे पहले कप्तान, जिन्होंने मुझ पर काफी विश्वास जताया.'' इसके साथ-साथ उन्होंने बीसीसीआई को भी शुक्रिया कहा। उन्होंने लिखा, ''17 साल की उम्र में बीसीसीआई ने उन्हें खेलने का मौका दिया, उसके लिए मैं हमेशा शुक्रगुजार रहूंगा। ' उन्होंने कहा, ''मैं आईपीएल टीमों और उनके मालिकों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे टीम में शामिल किया और मेरा ध्यान रखा। 

बता दे कि 35 साल के पार्थिव ने भारत के लिए 25 टेस्ट, 38 वनडे और दो टी20 इंटरनेशनल खेले हैं। 

पार्थिव पटेल ने 2002 में भारतीय क्रिकेट टीम में डेब्यू किया था और इसी के साथ वह टेस्ट क्रिकेट में डेब्यू करने वाले सबसे कम उम्र के विकेटकीपर बने थे।  उन्होंने 17 साल और 153 दिन की उम्र में डेब्यू किया था। 

जबकि, विकेटकीपर के तौर पर पार्थिव ने साल 2018 में भारत की ओर से अपना आखिरी टेस्ट मैच खेला था। वहीं, आईपीएल में पार्थिव आखिरी पार आरसीबी टीम की ओर से खेले थे। इसके अलावा सीमित ओवरों में सलामी बल्लेबाज के रूप में कुछ मैच खेले। साथ ही वह घरेलू क्रिकेट में काफी कामयाब रहे और 194 प्रथम श्रेणी मैचों में 27 शतक समेत 11240 रन बनाए। पार्थिव की कप्तानी में गुजरात ने 2016-17 में रणजी खिताब जीता। 

इतना ही नहीं पार्थिव ने हमेशा स्वीकार किया कि वह धोनी को दोष नहीं दे सकते क्योंकि उन्हें और दिनेश कार्तिक को धोनी से पहले टीम में अपनी जगह पक्की करने के मौके मिले थे।