सभी खबरें

Bharat Bandh : किसानों को कई राजनीतिक दल और ट्रेड यूनियन का समर्थन, गृह मंत्रालय ने जारी की एडवाइजरी 

नई दिल्ली – केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों ने आज भारत बंद का ऐलान किया हैं। किसानों के समर्थन में कई राजनीतिक दल और ट्रेड यूनियन हैं। हालांकि किसान नेताओं ने कहा है कि किसी को भी बंद में शामिल होने के लिये बाध्य नहीं किया जाएगा। 

सभी से 'सांकेतिक' बंद में शामिल होने की अपील करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि अपने प्रदर्शन के तहत पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक वे 'चक्का जाम' प्रदर्शन करेंगे, जिस दौरान प्रमुख सड़कों को जाम किया जाएगा। प्रदर्शन के तहत उत्तरी राज्यों खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के किसान सड़कों पर उतरे हैं 

केंद्र सरकार ने जारी की एडवाइजरी 

बंद और प्रदर्शनों के आह्वान के मद्देनजर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जारी देशव्यापी परामर्श में कहा कि राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन किया जाए और सामाजिक दूरी रखी जाए। वही, भारत बंद को देखते हुए राज्यों को एडवाइजरी जारी की हैं। एडवाइजरी में गृह मंत्रालय ने कहा कि राज्य सुनिश्चित करें कि भारत बंद शांति पूर्वक हो और किसी भी तरीके की अप्रिय घटना ना हो। 

5  राउंड की हो चुकी है बातचीत

किसानों और सरकार के बीच अभी तक 5 राउंड बातचीत हो चुकी है, लेकिन गतिरोध जारी हैं। अब 9 दिसंबर को सरकार और किसानों के बीच फिर बातचीत होनी हैं। हालांकि किसान संगठनों ने सरकार से कहा है कि जब तक नए कृषि कानून वापस नहीं होंगे तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। 

दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई सीमाओं की सुरक्षा

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राकांपा नेता शरद पवार, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन और पीएजीडी अध्यक्ष फारुख अब्दुल्ला समेत प्रमुख नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी कर एक दिवसीय बंद का समर्थन किया और केंद्र से किसानों की जायज मांगों को पूरा करने को कहा। इस बीच पुलिस ने दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर सुरक्षा और बढ़ा दी हैं। 

कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी 

केरल सरकार केंद्र के कृषि कानूनों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं। केरल सरकार ने इस हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों को चुनौती देने का फैसला किया हैं। राज्य सरकार ने केंद्र के नए कृषि कानून को लागू न करने का निर्णय किया हैं।  सरकार का कहना है कि कृषि केवल केंद्र के अधीन नहीं है, बल्कि राज्य को भी तय करना हैं। इस पर केंद्र एकतरफा फैसले नहीं ले सकती हैं। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button