
अखंड सौभाग्य को सुहागिनों ने रखा हरतालिका तीज का निर्जला व्रत
रीवा/ गौरव सिंह:- अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने शुक्रवार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर हरितालिका तीज व्रत रखा। इस मौके पर 24 घंटे का निर्जला व्रत रख कर महिलाएं शाम 6 से 9 बजे के बीच मां पार्वत और भोले शंकर की पूजा करेंगी। सुहाग की निशानी चढ़ाई जाएगी। इस मौके पर कुछ कुंवाई कन्याएं भी योग्य वर के लिए उपवास रखती हैं। इस व्रत में पूरे दिन निर्जल व्रत रख कर अगले दिन पूजन के बाद ही व्रत पूरा करने का विधान है।ऐसी मान्यता है कि सर्वप्रथम इस व्रत को माता पार्वती ने भगवान शिव शंकर के लिए रखा था। इस दिन विशेष रूप से गौरी-शंकर का ही पूजन की मान्यता है। लिहाजा व्रती महिलाएं सुबह उठ कर स्नान-ध्यान से निवृत्त हो कर श्रृंगार में जुट गईँ। पूजन के लिए केले के पत्तों से मंडप बनाया गया। इस मंडप में गौरी-शंकर की मृणमयी प्रतिमा (कच्ची मिट्टी की प्रतिमा) स्थापित की गई। फिर मां पार्वती को सुहाग का सारा सामान चढ़ाया गया। अब रात में हरितालिका व्रत कथा का श्रवण करने के साथ ही शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनी जाएगी। इस व्रत से जुड़ी मान्यता यह है कि इस व्रत को करने वाली स्त्रियां पार्वती के समान ही सुखपूर्वक पतिरमण करके शिवलोक को जाती हैं।