
जब अमेरिका में अडानी पर घूसखोरी के मामले में केस दर्ज हुआ, तो दुनिया के सभी बैंकों ने अडानी को लोन देने से मना कर दिया। लेकिन तब हमारे देश के प्रधानमंत्री दोस्ती निभाने आगे आए।
भाजपा सरकार ने एलआईसी पर दबाव बनाकर अडानी समूह की कंपनियों में 34,000 करोड़ रुपये का निवेश करवाया यानी देश की जनता के बचत वाले पैसों से अडानी का कर्ज उतारा गया।
रुपया देशवासियों का, पॉलिसी देशवासियों की, और सुरक्षा अडानी की।
यह पैसा किसी उद्योगपति की मदद के लिए नहीं, बल्कि आम आदमी की जरूरत और भविष्य की सुरक्षा के लिए था। किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों सबकी गाढ़ी कमाई इस एलआईसी में लगी थी, जिसे अडानी के इस्तेमाल में दे दिया गया।
हमारे नेता आदरणीय राहुल गांधी जी लगातार अडानी और भाजपा सरकार की मिलीभगत की पोल खोलते आ रहे हैं, लेकिन देश की मीडिया ने कभी भी भाजपा सरकार से इस पर सवाल नहीं पूछा।
माननीय नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी ने 3 जून को स्पष्ट कहा था:
“पैसा, पॉलिसी, प्रीमियम आपका सुरक्षा, सुविधा, फायदा अडानी का!”
और आज वो सच साबित हो गया है।
चाहे असम में करोड़ों की ज़मीन अडानी के नाम करना हो, या बिहार में 1 रुपये में 1000 एकड़ ज़मीन देना हो, चाहे देश की बिजली व्यवस्था अडानी के नाम करना हो या एयरपोर्ट बेचना हो हर मोर्चे पर आदरणीय राहुल गांधी जी द्वारा उजागर की गई अडानी और भाजपा की मिलीभगत सच साबित होती है।
सोचिए, जब एलआईसी को पहले ही अडानी के शेयरों में निवेश कर भारी नुकसान हो चुका था, तब भी मोदी सरकार ने उसी दिशा में और पैसा लगाने का आदेश दिया।
यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि मोदी सरकार देश के संसाधनों, संस्थाओं और जनता के विश्वास को एक उद्योगपति के लिए गिरवी रख रही है। इससे साफ जाहिर होता है कि हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को देश की जनता की परवाह नहीं है और वे दिन-रात सिर्फ़ अपने मित्र अडानी के लिए काम करते हैं।
पिछले 10 वर्षों में भाजपा सरकार ने अडानी समूह को कई सुविधाएं दी हैं, सब्सिडी दी है, एयरपोर्ट से लेकर कई राष्ट्रीय धरोहरें अडानी को बेच दी गईं, हजारों करोड़ों की ज़मीन कौड़ियों के भाव में दी गई, और अब आम जनता का पैसा भी अडानी के लिए इस्तेमाल कर दिया गया है।
सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल ने कहा आज राहुल गांधी की कही एक-एक बात सच साबित हो रही है।