
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की कुछ दवा कंपनियों (Pharma Companies) द्वारा बनाए गए कफ सिरप (Cough Syrup) के नमूनों का जांच में फेल हो जाना अब एक बड़ा राजनीतिक (Political) मुद्दा बन गया है। मामला तब सुर्खियों में आया जब विभिन्न राज्यों में इन सिरप के सेवन से बच्चों की मौतें (Deaths) हुईं। विपक्ष के प्रमुख नेताओं ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि इन कंपनियों ने चुनावी बॉन्ड (Electoral Bond) के माध्यम से सत्ताधारी पार्टी को बड़ा चंदा दिया है, जिसकी वजह से स्वास्थ्य विभाग (Health Department) उन्हें संरक्षण दे रहे हैं। यह मामला दवा नियंत्रण विभाग (Drug Control Department) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है।
पूर्व सीएम ने दावा किया कि जिन दवा कंपनियों ने जहरीली दवाएं बेचीं, उन्हें संरक्षण इसलिए मिल रहा है क्योंकि उन्होंने केंद्र में सत्ता में बैठीबैठी बीजेपी को चुनावी फंड दिया है. उन्होंने कहा कि दवा कंपनियों ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से कुल 945 करोड़ रु बीजेपी को चंदा,उन्होंने कहा कि यह हादसा सिर्फ एक दवा की गड़बड़ी नहीं, बल्कि नकली दवाओं के संगठित कारोबार और सरकारी मिलीभगत का परिणाम है। दिग्विजय सिंह ने कहा कि कफ सिरप में डाय-एथिलीन ग्लाइकोल (DEG) की मात्रा 48.6 प्रतिशत पाई गई, जबकि स्वीकृत सीमा केवल 0.1 प्रतिशत है- यानी 486 गुना ज्यादा जहर। यह मानव जीवन के साथ खुला खिलवाड़ है, यह हादसा नहीं, हत्या है।