"हां देश में है मंदी का दौर", "लोग हो रहे है बेरोज़गार", इस बात को मानने से आखिर क्यों डरती है मोदी सरकार?  

नई दिल्ली / खाईद जौहर – देश में मंदी का दौर लगातार बना हुआ हैं। लेकिन मोदी सरकार है कि इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। बुधवार को जब कांग्रेस की और से राज्यसभा में केंद्र सरकार पर अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर सवाल खड़े किये गए, तो देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से रहा नहीं गया। उन्होंने सभी सवालो का जवान देते हुए कहा कि भले ही आर्थिक ग्रोथ (Economic Growth) की रफ्तार कम हुई है, लेकिन देश मंदी के दौर से नहीं गुजर रहा हैं। 

गौरतलब है कि कांग्रेस नेता आंनद शर्मा ने अर्थव्यवस्था को लेकर मोदी सरकार का घेराव किया था। उन्होंने मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा की देश में गरीब और अमीर की बीच में भारी अंतर हैं। बीते पांच साल के दौरान यह बढ़ते हुए एक डरावने स्तर पर पहुंच गया हैं। अर्थव्यवस्था की इस बुरी हालत का कारण उन्होंने नोटबंदी और जीएसटी को बताया। 

कांग्रेस नेता आंनद शर्मा ने कहा कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 5 फीसदी के स्तर पर फिसल चुका है जोकि बीते 7 साल का न्यूनतम स्तर हैं। ऑटो और टेक्टाइल इंडस्ट्री (Auto and Textile Industry) में करीब 2.5 करोड़ लोगों की नौकरी जा चुकी हैं। जो बेरोजगारी (Unemployment Rate) दर अमूमन 3 फीसदी के करीब रहती थी, वो आज बढ़कर 8 फीसदी तक पहुंच गई हैं। 

इन सब का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि देश मंदी के दौर से नहीं गुजर रहा हैं। हां आर्थिक ग्रोथ (Economic Growth) की रफ्तार कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि 'अगर आप विवेक की दृष्टि से अर्थव्यवस्था को देख रहे हैं तो पाएंगे कि ग्रोथ भले ही कम हुआ है, लेकिन यह मंदी का दौर नहीं हैं। 

इस दौरान वित्त मंत्री सीतारमण ने साल 2014 से लेकर 2019 के बीच में GDP दर का हवाला देते हुए कहा कि यह साल 2009-14 के बीच की तुलना में कहीं अधिक हैं। 2014 से 2019 के बीच जीडीपी दर 7.5 फीसदी रही हैं। वहीं, 2009 से लेकर 2014 के बीच महज 6.4 फीसदी रही थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था में मंदी नहीं हैं। देश के लिए ऐसी स्थिति नहीं आएगी। 

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