WhatsApp के खिलाफ पूर्व RSS कार्यकर्ता की याचिका SC ने की खारिज

WhatsApp के खिलाफ पूर्व RSS कार्यकर्ता की याचिका SC ने की खारिज

 

 सुप्रीम कोर्ट  ने पूर्व RSS कार्यकर्ता केएन गोविंदाचार्य की पेगासस स्पाइवेयर को लेकर व्हाट्सएप के खिलाफ उचित कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका खारिज करते हुए कहा है कि पहले यह मामला हाईकोर्ट में जाना चाहिए गोविंदाचार्य ने कहा है कि यह ऐप एंड 2 एंड इंक्रिप्शन का दावा करता है इसलिए व्हाट्सएप पर खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए

क्या होता है पेगासस स्पाइवेयर (Pegasus Spyware) ? 

हाल ही में व्हाट्सएप के ज़रिये इज़रायली स्पाइवेयर पेगासस की मदद से कुछ अज्ञात इकाइयाँ वैश्विक स्तर पर लोगों की जासूसी कर रही हैं। भारतीय पत्रकार एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता भी इस जासूसी के शिकार हुए हैं। व्हाट्सएप ने इस बात को माना है और पेगासस स्पाइवेयर विकसित करने वाली कंपनी एन.एस.ओ. ग्रुप (NSO Group) पर संयुक्त राज्य अमेरिका के संघीय न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। हालाँकि NSO ने कहा कि वह पेगासस की सेवाएँ केवल सरकारों और उनकी एजेंसियों को बेचता है। माना जाता है कि पेगासस दुनिया में सबसे परिष्कृत स्पाइवेयर में से एक है। ऑपरेटिंग सिस्टम में कमज़ोरियों को लक्षित करके स्पाइवेयर iOS और Android दोनों उपकरणों को हैक कर सकता है।

 

 

पेगासस स्पाइवेयर के बारे में

ज्ञातव्य है कि 1.5 अरब लोग व्हाट्सएप का उपयोग करते हैं, जबकि भारत में यह संख्या लगभग 40 करोड़ है।

क्या होता है स्पाइवेयर?

स्पाइवेयर एक प्रकार का मैलवेयर है जो डिज़िटल डिवाइस जैसे- कंप्यूटर, मोबाइल, टेबलेट से गुप्त एवं निजी जानकारियाँ चुराता है। यह जीमेल अकाउंट, बैंक डिटेल्स, सोशल मीडिया से लेकर टेक्स्ट मैसेज जैसी गतिविधियों पर नज़र रखता है एवं वहाँ से डेटा चोरी करके अपने ऑपरेटर तक पहुँचाता है।

यह ज़्यादातर नवीनतम डिवाइस मॉडल और ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ जुड़ा होता है।इन्हें इस तरह से डिज़ाइन किया जाता है कि डिवाइस यूज़र को डिवाइस में स्पाइवेयर के होने का पता न चल सके।

कई बार कंपनियाँ अपने कंप्यूटर सिस्टम में खुद स्पाइवेयर डलवाती हैं ताकि ये पता कर सकें कि कर्मचारी अपना काम सही तरीके से कर रहे हैं या नहीं।

स्पाइवेयर कई प्रकार के होते हैं:

ऐडवेयर- यह सामान्य प्रकार का स्पाइवेयर है जो मुख्य रूप से विज्ञापनदाताओं द्वारा उपयोग में लाया जाता है।

कुकी ट्रेकर- इसके ज़रिये किसी व्यक्ति की इंटरनेट गतिविधियों के बारे में जानकारी एकत्रित की जाती है।

सिस्टम मॉनीटर- इसका उपयोग डिवाइस की गतिविधियों पर नज़र रखने और डेटा रिकॉर्ड करने हेतु किया जाता है।

ट्रोज़न- इसे वास्तविक एप्लीकेशन, दस्तावेज़ या सॉफ्टवेयर के रूप में चित्रित किया जाता है।

व्हाट्सएप के अनुसार, इसके ज़रिये भेजे जाने वाले मैसेज End to End Encripted होते है और इन्हें बीच में कोई भी इंसान पढ़ नहीं सकता।

इन्क्रिप्शन एवं डीक्रिप्शन

जब हम इंटरनेट पर कोई संवेदनशील या महत्त्वपूर्ण सूचना सेव करते हैं तो हम उस सूचना को हैक होने से बचाने के लिये इन्क्रिप्ट कर देते हैं। अर्थात् उसे एक कूट भाषा या कोड में बदल देते हैं ताकि किसी अन्य व्यक्ति के पास पहुँचने पर भी सूचना को पढ़ा न जा सके। दरअसल इन्क्रिप्शन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें सूचना को ऐसे फॉर्म/कोड में बदल दिया जाता है जिसे समझना आम आदमी के लिये मुश्किल होता है।

वहीं डीक्रिप्शन की प्रक्रिया इन्क्रिप्शन के ठीक विपरीत होती है, जिसमें किसी इन्क्रिप्टेड या कोडेड फाइल/मैसेज को डी कोड कर उसे ऐसे फॉर्म में बदल दिया जाता है जो आम आदमी की समझ में आए।

स्पाइवेयर से बचाव के तरीके

इसके अलावा साइबर सुरक्षा के बारे में लोगों को जानकारी देने और साइबर अपराधों को कम करने के लिये दिशा-निर्देश तैयार किये गए है। युवाओं विशेषतौर पर बच्चों के लिये गृह मंत्रालय द्वारा एक पुस्तिका जारी की गई है, जिसमें बच्चों को धमकी देना, सोशल साइट्स पर बहलाना-फुसलाना, ऑनलाइन गेमिंग, धोखाधड़ी, सोशल नेटवर्किंग के ज़रिये छेड़छाड़ से सुरक्षा के उपाय बताए गए हैं।

 

 

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