
मध्यप्रदेश: उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लगभग 450 सहायक प्राध्यापकों के पद की स्वीकृति आदेश आज जारी कर दिए हैं।इसका सीधा अर्थ यह होगा कि प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में सहायक प्राध्यापकों के पदों में इज़ाफ़ा कर दिया गया है। जिससे न सिर्फ उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार होगा बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए भी उच्च शिक्षा के बेहतरीन अवसर उपलब्ध होंगे।सरकार के इस कदम को स्वागतयोग्य बताते हुए अतिथिविद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष डॉ देवराज सिंह ने कहा है कि सरकार द्वारा नवसृजित 450 पदों से फालेन आउट अतिथिविद्वानों के लिए व्यवस्था में पुनः बहाली की संभावना प्रबल हुई है।
अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण कर वर्षों के शोषण को समाप्त करें सरकार
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ मंसूर अली ने कहा है कि सरकार ने 450 सहायक प्राध्यापक के पदों को मंजूरी देकर फालेन आउट अतिथिविद्वानों की बहाली का मार्ग प्रशस्त किया है, किंतु हमारी सबसे बड़ी मांग अतिथविद्वान नियमितीकरण अब भी अधूरी है। शाहजहांनी पार्क भोपाल के बहुचर्चित आंदोलन के दौरान स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरी सभा मे वादा किया था कि हमारी सरकार बनते ही हम सबसे पहले अतिथि विद्वानों के लिए नियमितीकरण की नीति बनाएंगे किंतु अब तक यह वादा अधूरा ही है।
450 पद तो बढ़ाये किंतु विषयवार संख्या अनियमित है
अतिथि विद्वान मोर्चा के मीडिया प्रभारी डॉ जेपीएस चौहान ने कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लगभग 450 नवीन पद तो सृजित किये गए हैं किंतु विषयवार संख्या बेहद अनियमित है। कुछ विषय मे पदों की भरमार है जबकि भूगोल जैसे महत्वपूर्ण विषय के एक पद भी सृजित नही किया गया है।विभाग की यह नीति समझ से परे है। आवश्यकता इस बात की भी है कि सभी विषयों को समान महत्व देते हुए सभी विषयों का समन्वय अत्यावश्यक है।
अतिथि विद्वानों की सेवा शर्तों में होना चाहिए सुधार
संघ के मीडिया प्रभारी डॉ आशीष पांडेय का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग में 2003 से जारी अतिथिविद्वान व्यवस्था में समय के साथ अब सुधार की अत्यंत आवश्यकता है। उल्लेखनीय है कि कोरोना काल मे भी अतिथिविद्वानों को आकस्मिक अथवा चिकित्सकीय अवकाश की कोई सुविधा नही दे गई। शायद सरकार यह मान कर चल रही है कि अतिथिविद्वान एक ऐसी प्रजाति है जो कभी बीमार ही नही पड़ती है। महंगाई की मार झेल रहे अतिथिविद्वानों ने अपने मानदेय को भी बढ़ाने की मांग की है।