MP में वायरल फीवर-डेंगू का कहर, भोपाल-जबलपुर में सबसे ज़्यादा बच्चें इसकी चपेट में, मंत्री सारंग बोले, कोई रहस्यमयी बुखार नहीं…

भोपाल/खाईद जौहर : मध्यप्रदेश के कई जिलों में वायरल फीवर और डेंगू कहर बरपा रहा है। इस वायरल फीवर और डेंगू की चपेट में सबसे ज़्यादा बच्चें आ रहे हैं। बात करे अगर राजधानी भोपाल की तो यहां बीमारी होने वाले बच्चों की संख्या ही 355 से ज्यादा है। भोपाल में 50 से 60 बच्चे रोज वायरल फीवर का शिकार हो रहे हैं। इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। ओपीडी की संख्या भी सरकारी-निजी अस्पतालों में 60% बढ़ा दी गई है। 

वहीं, वायरल इंफेक्शन के लगातार बढ़ रहे मामलों ने चिंता तो बढ़ाई ही है साथ ही अस्पताल प्रशासन की पोल भी खोल दी है। बता दे कि भोपाल के सरकारी अस्पतालों की हालात ये है कि एक बेड पर 2-2 बच्चों का इलाज किया जा रहा है वो भी मां के साथ। करीब-करीब सभी अस्पताल बच्चों से भर चुके हैं। 
इस से पहले भोपाल के ही जेपी अस्पताल से ऐसी तस्वीर सामने आई थी जहां बच्चों को पेटी पर लिटाकर इलाज किया जा रहा था। बताया गया था कि “जेपी अस्पताल में बच्चों के लिए दो वार्ड आरक्षित हैं। इनमें 30 बेड है, जबकि यहां 46 बच्चे भर्ती हैं। ऐसे में बच्चों को पेटी पर लिटाकर इलाज करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, भोपाल में वायरल फीवर बच्चों पर सीधा असर कर रहा है। 

इधर, जबलपुर में मरीजों का आंकड़ा 500 के आसपास छू रहा है। जबलपुर में निजी के साथ साथ बड़े सरकारी अस्पतालों में भी हालात भयावह है। शहर के बड़े अस्पतालों में से एक विक्टोरिया अस्पताल के चाइल्ड वार्ड में एक बेड पर 2 से 3 बच्चे तक भर्ती हैं। 24 बेड की व्यवस्था वाले चाइल्ड वार्ड में 55 से 60 बच्चे एडमिट हैं। मिली जानकारी के अनुसार जबलपुर में मरीजों का आंकड़ा 500 के करीब है जबकि, सरकारी आंकड़ों में यहां मात्र 333 मरीज ही हैं। 

वहीं, इस पुरे मामले पर चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग का कहना है कि अस्पतालों की व्यवस्था का लगातार जायजा ले रहे हैं। वायरल की चपेट में आ रहे बच्चों की बढ़ती संख्या के बीच अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और तमाम व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश या किसी अन्य राज्य की तरह मध्य प्रदेश में बच्चों में किसी भी तरह का कोई रहस्यमयी बुखार नहीं है। सिर्फ वायरल फीवर के लक्षण बच्चों में है। किसी भी तरह से वायरल को लेकर पैनिक फैलाने की जरूरत नहीं है। 

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश में कोरोना, डेंगू के बाद अब वायरल फीवर का प्रकोप बढ़ने लगा है। जिसका ज़्यादा असर बच्चों में देखा जा रहा है। हालात ये हो गए है कि बच्चों को अस्पताल में भर्ती करने के लिए बेड कम पड़ने लगे हैं।

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