
लड़ेंगे तभी जीतेंगे:- लंग्स में हुआ 95% का इन्फेक्शन, पर फिर भी कोरोना को हराकर लौटी उज्जैन की उषा
उज्जैन:- मप्र में कोरोना का कहर चरम पर है.इसी बीच सुखद खबर सामने आई.उज्जैन की एक महिला को कोरोना (Corona) के कारण लंग्स में 95 प्रतिशत तक इंफेक्शन हो गया था. लेकिन अब वो स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुकी हैं.
वाक़ई कोरोना से लड़ा जा सकता है हराया जा सकता है.
कोरोना से लड़ाई का जज्बा और घर परिवार वालों का सपोर्ट मिल जाए तो 95 प्रतिशत इंफेक्शन वाला मरीज भी इस भयानक महामारी को मात दे सकता है. उज्जैन जिला सहकारी बैंक की रिटायर्ड मैनेजर उषा निगम का तो यही संदेश है. उन्हें कोरोना हुआ और लग्स में इंफेक्शन इतना बढ़ा तो डाक्टरों ने साफ कह दिया था कि अब बचना मुश्किल है. लेकिन परिवार और मरीज ने हिम्मत नहीं खोयी. 50 दिन से अधिक समय तक आईसीयू और करीब 80 दिन तक लगातर ऑक्सीजन पर रहने के बाद भी आज उषा निगम स्वस्थ होकर घर लौट चुकी हैं और अब अपने परिवार के साथ राजी खुशी से रह रही हैं.
उज्जैन जिला सहकारी बैंक में मैनजेर के पद पर से रिटायर हुईं 62 वर्षीय उषा निगम अपनी बहन की मौत के बाद गम में उनके घर देवास चली गयीं. वहां से तीन दिन बाद जब घर लौटीं तो उन्हें खांसी और बुखार हो गया. जब जांच कराया गया तों वह पॉजिटिव हो गई .परिवार ने फौरन उसी दिन उन्हें माधव नगर अस्पताल के कोविड वॉर्ड में भर्ती करा दिया. 22 अक्टूबर को पहला सीटी स्कैन कराया तो रिपोर्ट में लंग्स में इंफेक्शन जीरो आया. लेकिन दो दिन बाद ही 24 तारीख को हालत बिगड़ने लगी. उन्हें फौरन माधव नगर अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा..
उषा को कुल 12 रेमडेशिविर के इंजेक्शन लगे. परिवार वालों के हिम्मत से आखिरकार उषा स्वस्थ होकर घर लौट आई.मां की हालत लगातार ख़राब होती देख बेटों और बहुओं ने उनका साथ और हिम्मत नहीं छोड़ी. वो पीपीई ड्रेस पहनकर अस्पताल में अपनी मां से मिलने गए. उन्हें हिम्मत बंधायी. रोजाना घर का खाना भेजने की व्यवस्था की. रेमडेसिविर के 5 इंजेक्शन का डोज फिर लगा.
डॉक्टरों ने कह दिया था कि यह बचेंगी नहीं पर शुरुआती 4 दिन नॉर्मल कोरोना वॉर्ड में बाकी 40 दिन आईसीयू में भर्ती रहीं. और डॉक्टरों की कोशिश और उनकी हिम्मत ने उन्हें कोरोना से जीत दिला दिया.