
- महामारी आरोही क्रम में और स्वास्थ्य व्यवस्था अवरोहन में
- जिनके भरोसे प्रदेश था उनकी ही नैया डूब गई
- पुत्र मोह में अंधी माता ने पूरे प्रदेश को बैसाखी के सहारे छोड़ा
भोपाल डेस्क (गौतम कुमार): कोरोना संकट से पहले मध्य प्रदेश में घोर सियासी संकट चल रहा था। कांग्रेस की सरकार गिरने के बाद 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। इस दौरान देश में कोरोना संकट भी चल रहा था। ठीक एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा कर दिया। जिस कारण राज्य में मंत्री परिषद का गठन भी नहीं हो सका था।
मंत्री परिषद के बिना मुख्यमंत्री
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री तो हैं पर मंत्री परिषद नदारद है। यानी राज्य में एक सदस्यीय मंत्री परिषद है। मंत्री परिषद की समस्त शक्तियां मुख्यमंत्री में निहित हैं। बता दें कि यह पूर्ण रूपेण असंवैधानिक है और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 (1A) का उल्लंघन है। जिसके अनुसार किसी भी राज्य की मंत्री परिषद में कम से कम बारह सदस्य (मुख्य मंत्री सहित) होने चाहिए।
वर्तमान में मध्यप्रदेश में कहा जा सकता है कि संविधान के अनुरूप मंत्री परिषद नहीं है। एक सदस्यीय मंत्री परिषद की कोई भी अनुशंसा राज्यपाल पर बंधनकारी नहीं है और ऐसी किसी अनुशंसा के आधार पर किया गया कोई भी कार्य या नियुक्ति न्यायालय द्वारा निरस्त की जा सकती है।
बहरहाल, राज्य समेत पूरे देश में महामारी फैली हुई है। जिस कारण मंत्रिमंडल गठन में देरी हुई है। मुख्यमंत्री ने आज वीडियो के माध्यम से कहा भी है कि कोरोना के खिलाफ युद्ध के कारण यह देरी हुई है, कुछ दिनों बाद मंत्रिमंडल का गठन किया जाएगा।
पुत्र मोह में अंधी “प्रमुख सचिव”
अभी प्रमुख मुद्दा केवल यह नहीं है कि सरकार असंवैधानिक है। बल्कि मुद्दा यह है कि इस संकट की घड़ी में मंत्रालय और प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी के बीच उचित समन्वय बनाने में सरकार विफल साबित हो रही है। पूरे प्रदेश की जनता से ट्रेवल हिस्ट्री मांगने वाले स्वास्थ्य विभाग के मुखिया ही अपने बेटे की ट्रैवल हिस्ट्री सरकार से छिपा रखी थी। स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख सचिव और डायरेक्टर ही कोरोना वायरस से पीड़ित हैं और अपनी लापरवाही के कारण पूरे महकमे को भी पीड़ित बना दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव पल्लवी जैन गोयल कोरोना पॉजिटिव पाई गईं क्योंकि उनका बेटा जोकि विदेश से आया था वह कोरोना संक्रमित था और पुत्र मोह में अंधी प्रमुख सचिव पल्लवी जैन ने यह जानकारी विभाग और सरकार से छुपाई। जिस कारण बेटे से माँ और 'प्रमुख सचिव' मां से पूरे स्वास्थ्य विभाग में अब तक 75 अधिकारियों में कोरोना का फैलाव हो गया है। भोपाल में कुल 142 कोरोना संक्रमितों में 75 अधिकारी हैं जिनमें कुछ आईएएस अधिकारी भी हैं।
सोमवार को मालवा जिले के पत्रकार को कोरोना संक्रमित पाए जाने पर शासन द्वारा अविलंब उसके ऊपर प्राथमिकी दर्ज की जाती है। जबकि जो स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रदेश को सुरक्षा देने का काम करती उसे ही अपंग कर देने वाली स्वास्थ्य सचिव पल्लवी जैन के ऊपर न कोई कार्रवाई हुई है और न पद से हटाया गया है।
आज हमारे आगर मालवा के साथी @jaffer_multani पर एफआईआर दर्ज की गई है, @ChouhanShivraj @CMMadhyaPradesh
आपके अधिकारी कोरोना लेकर घूमते रहे, एक अधिकारी से आंकड़ा 70 तक पहुंचा कितनों पर एफआईआर हुई?? @brajeshabpnews@delayedjab @OfficeOfKNath@jitupatwari@INCMP— Anurag Dwary (@Anurag_Dwary) April 13, 2020
बजाय इसके की मैडम अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करवातीं, मैडम ने अपनी सेवा के लिए डॉक्टर और नर्स की एक टीम को घर पर ही लगा रखा है। मैडम यदि झूठ ना बोलीं होती, बेटे की ट्रैवल हिस्ट्री को नहीं छिपाने के बजाय अपने दायित्व का निर्वहन किया होता तो शायद पूरे प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा आज बैसाखी के सहारे नहीं रेंग रहा होता।
This is Pallavi Jain, Principal Secy Health Dept MP
Hid son's Travel history frm US. Now herself COVID+ infected 36 others in Dept.
On top of it, Instead of getting admitted in hosp she has called Govt Docs to attend to her at home!
Kindly Sack her @ChouhanShivraj @OfficeofSSC pic.twitter.com/ManODdW9cX— theZULU🇮🇳 (@RaveenKr) April 10, 2020
बैसाखी के सहारे है मध्य प्रदेश
दूसरी तरफ राज्य की आर्थिक राजधानी और देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर भी कोरोना का हॉटस्पॉट बना हुआ है। मिली जानकारी के अनुसार वहां कई ऐसे मामले भी आए हैं जिनमें अस्पताल से मृतकों का शव परिवार को बिना किसी सुरक्षा के सौंप दिया जा रहा है और बाद में उनकी रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हो रही है।
नेहरू नगर की रहने वाली स्नेही धवन की कोरोना से मौत पहले होती है और संक्रमण की पुष्टि दो दिन बाद होती है। तब तक मृतक का शव परिजनों को सौंप दिया जा चुका होता है। ऐसा ही मामला राजधानी भोपाल से भी प्रकाश में आया है जहां एक बुजुर्ग जगन्नाथ को 6 अप्रैल को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, 9 अप्रैल को उनकी मौत हो गई और मौत का कारण प्राकृतिक बताया गया जबकि 12 अप्रैल को आई जांच रिपोर्ट में मृतक जगन्नाथ को कोरोना पॉजिटिव पाया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार हमीदिया अस्पताल की एंबुलेंस शव को सामान्य तरीके से ही लेकर आई थी, प्लास्टिक कवर नहीं किया गया था। सूचना यह भी है कि शव की अंत्येष्टि में काफी लोग शामिल भी हुए थे। ऐसी ही कहानी राजकुमार यादव के केस का भी है, राजकुमार के मौत के समय सैंपल लिया गया और 13 अप्रैल, सोमवार को जब जांच रिपोर्ट आई तब उसे भी कोरोना संक्रमित पाया गया। ऐसे मामले सरकार और व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं। खैर, जिस प्रदेश का तंत्र ही संवेदनहीन हो फिर जनता का मालिक भगवान ही होता है ……