मुख्यमंत्री कमलनाथ का ट्वीट, कहा – यूरिया कमी के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार

प्रदेश में यूरिया की भारी किल्लत के बीच राजनीति गरमाने लगी है। जहां एक तरफ यूरिया की कमी से किसान परेशान हैं तो वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री  कमलनाथ ने यूरिया की कमी के लिए केंद्र सरकार को निशाना बनाया है।  बताते चले कि प्रदेश अभी यूरिया की भारी कमी झेल रहा है।  सुबह से शाम तक किसान लाइनों में लगकर यूरिया प्राप्त कर रहे हैं।  वहीं कई ऐसे भी किसान हैं जिन्हें लाइन में  लगने के बाद भी खाद्य नहीं मिल पा रहा है जिससे किसानों में  आक्रोश है।  इसी वजह से कई जगह कल चक्काजाम के साथ यूरिया के लूट की खबर भी सामने आयी थी। 

 

जिसके बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने ट्वीट करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा था। अपने ट्वीट में  उन्होंने कहा कि केंद्र द्वारा यूरिया के कोटे में  कमी कर दी गयी है।  जिसके कारण आपूर्ति में  दिक्कत आ रही है।  साथ ही उन्होंने यह  भी कहा है कि हमनें रबी मौसम देखते हुए केंद्र  सरकार से 18 लाख मिट्रिक टन यूरिया की मांग की थी परन्तु केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त यूरिया नहीं दिया गया।  उन्होंने कहा कि यूरिया की आपूर्ति को लेकर सरकार  प्रयासरत है।

विपक्ष पर वार, कहा केंद्र पर दबाव डाले बीजेपी

ट्वीट में उन्होंने कहा कि मांग की बढ़त और केंद्र द्वारा खाद्य के कोटे की कमी से हमारे किसान भाइयों को दिक्कत का सामना करना पड़  रहा है लेकिन हम केंद्र सरकार से यूरिया का कोटा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा अगर किसानों की सच्ची हितैषी है तो केंद्र सरकार पर दबाव बनाये और प्रदेश की मांग अनुसार आपूर्ति सुनिश्चित करवाए।

यूरिया की भारी किल्लत

मध्यप्रदेश के कई इलाकों में यूरिया का संकट बरकरार हैं। ज्ञात हो कि मंगलवार को सागर, खंडवा, उज्जैन, विदिशा, रायसेन, सीहोर, अशोक नगर और गुना में किसानों ने सड़क पर उतर कर विरोध दर्ज कराया था। जिसके बाद प्रदेश की सरकार ने दावे किये थे कि अब तक 18 रैक से ज्यादा यूरिया आ चुका है और आगामी 11 दिसंबर तक 49 रैक यूरिया और आ जाएगा। जिसके बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने कमलनाथ के दावे पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि आखिर किसानों को यूरिया के बदले लाठियां क्यों मिल रही है। किसानों को पुलिस थाने में यूरिया क्यों बांटा जा रहा है। खाद्य के उन्हें लम्बीं लम्बीं कतारें क्यों लगानी पड़ रही है।

Exit mobile version