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अब "Priyanka Gandhi" को राज्यसभा में लाने का सही वक़्त आ गया है – कांग्रेस नेता 

  • दिग्विजय-सिंधिया के बाद अब प्रियंका गांधी बनी राज्यसभा की नई दावेदार 
  • 9 अप्रैल को खत्म हो रहा तीन सीटों का कार्यकाल 
  • कांग्रेस नेताओं ने उठाई प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेजने की मांग 

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – अप्रैल में मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट खाली हो रही हैं। अभी इन सीटों से कांग्रेस के दिग्विजय सिंह (digvijay singh)  औऱ बीजेपी से सत्यनारायण जटिया (Satyanaryana Jatiya) और प्रभात झा (Prabhat Jha) सांसद हैं। तीनों का कार्यकाल 9 अप्रैल को खत्म हो रहा हैं। इस बार राज्यसभा में कांग्रेस के पास दो और बीजेपी के पास एक सीट हैं। 

कांग्रेस की ओर से राज्यसभा किसको भेजा जाएगा इसको लेकर अटकलें तेज़ हो गई हैं। हालांकि दिग्विजय सिंह (digvijay singh) और ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) पहले ही संभावित दावेदार हैं। दिग्विजय सिंह (digvijay singh) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं। शुरुआत से ही उनका राजनीति में काफी अहम योगदान रहा हैं। दिग्विजय सिंह (digvijay singh) की सक्रियता और राजनीति में कद को देखते हुए उन्हें फिर से राज्यसभा भेजा जाना तय सा माना जा रहा हैं। 

जबकि कांग्रेस के दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) में राज्यसभा सीट के दावेदार मानें जा रहे हैं। हालांकि वो पीसीसी चीफ के भी 
दावेदार मानें जा रहे थे, लेकिन हालही में उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ बयान दिया, जिसके बाद ये उम्मीद जताई जा रहीं है कि उन्हें अब राज्यसभा भेजा जाएगा। 

इसी कड़ी में अब पार्टी नेता प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) का नाम भी उछाल रहे हैं। रविवार को दिल्ली दौरे के दौरान सीएम कमलनाथ (Kamalnath) से नेताओं ने ये मांग रखी। प्रदेश के PWD मंत्री सज्जन सिंह वर्मा (Sajjan Singh Verma) ने ज़ोरशोर से ये मांग उठाई। वर्मा ने ट्वीट करते हुए लिखा- इंदिरा गांधीजी अनुसूचित जाति जनजाति एवं महिला वर्ग के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध थीं। उन्हीं के पद चिन्हों पर प्रियंका चल रही हैं। जिस तरह इंदिरा जी कमलनाथ को मध्यप्रदेश लाई थीं उसी तरह अब प्रियंका को प्रदेश से राज्यसभा में लाने का वक्त आ गया हैं। 

वहीं, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव (Arun Yadav) ने भी ट्वीट कर प्रियंका गांधी को राज्यसभा भेजने की मांग की। 

बता दे कि इस का अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) लेंगी। लेकिन कांग्रेस नेताओं की इस मांग ने एक बार फिर प्रदेश की सियासत को गरमा दिया हैं। 

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