ऑक्सीजन की कमी से हुई मौतों का सच, अस्पताल छोड़कर भाग गए थे कई डॉक्टर्स…..

मध्यप्रदेश : मध्यप्रदेश में अप्रैल महीने में ऑक्सीजन की हाहाकार मची थी। जबलपुर, ग्वालियर, इंदौर, भोपाल सहित कई जिले ऐसे थे जहां ऑक्सीजन की कमी से मरीजों की सांसें थम गई थीं। जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में अप्रैल माह में ऑक्सीजन की कमी से 60 मौतों के आंकड़े भी दिए गए। हालांकि सरकार ने जवाब में कोर्ट को बताया कि एक भी मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई हैं। 

जबकि, मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में कोर्ट मित्र की ओर से याचिका के माध्यम से प्रदेश में अप्रैल में 15 बड़ी लापरवाही के बारे में बताया गया था। इसमें ऑक्सीजन की कमी की वजह से मौत होने की बात कही थी। इस दौरान सबसे अधिक मौतें ग्वालियर और भोपाल में होना बताया गया था। लेकिन, केंद्र सरकार ने ऑक्सीजन की कमी से एक भी मौत नहीं होने की जानकारी राज्यसभा में दी हैं। 

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, 19 अप्रैल को ऑक्सीजन की कमी से राजधानी भोपाल के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में सुबह 5 से 7 बजे के बीच 10 कोरोना मरीजों की मौत हो गई। ये सभी डी ब्लॉक के कोविड वार्ड में भर्ती थे। अलसुबह अचानक ऑक्सीजन सप्लाई का प्रेशर कम हुआ और आईसीयू में भर्ती मरीजों को घबराहट होने लगी। इसे देख वार्ड का नर्सिंग स्टाफ चीखने-चिल्लाने लगा। अफरा-तफरी मच गई। कुछ नर्सों ने अपने परिचित मरीजों के परिजन को सूचना दी तो वे दौड़ते-भागते कोविड डी-ब्लॉक के चैनल गेट पर आ गए। यहां ताला लगा था। वे चिल्लाए कि ऑक्सीजन खत्म हो गई है, हमें अंदर जाने दो। हालांकि, हॉस्पिटल प्रबंधन ऐसी किसी भी घटना से इनकार करता रहा।

वहीं, बात करे जबलपुर की तो 23 अप्रैल को गैलेक्सी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पांच मौतें हुई थीं। ऑक्सीजन खत्म होने से एक-एक कर 5 कोविड संक्रमितों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया था। जब अस्पताल में मरीज दम तोड़ रहे थे, तो वहां का स्टाफ भाग निकला था। बताया जाता है कि पुलिस ने मौके पर पहुंच कर एक दूसरे अस्पताल के लिए जा रहे सिलेंडर को रुकवाया और खुद कंधे पर ढोकर अस्पताल तक भिजवाया। इससे 55 लोगों की जिंदगी बच गई थी। मामले को कांग्रेस के विधायकों तरुण भनोत, विनय सक्सेना व लखन घनघाेरिया ने भी प्रमुखता से उठाया था। गैलेक्सी हॉस्पिटल में कुल 65 कोविड संक्रमित भर्ती थे। इसमें 31 ऑक्सीजन पर थे और ICU में कुल 34 मरीज भर्ती थे।

जबकि, 15 अप्रैल को तड़के जबलपुर के आगा चौक स्थित लाइफ मेडिसिटी हार्ट सेंटर में ऑक्सीजन समाप्त होने से 82 वर्षीय वृद्धा ने दम तोड़ दिया। वहीं सुखसागर मेडिकल कॉलेज में 4 भी मरीजों की मौत हुई थी। 

इधर, ग्वालियर के JAH (जयारोग्य अस्पताल) परिसर में बने KRH (कमला राजा अस्पताल) की तीसरी मंजिल पर मेल वार्ड में 27 अप्रैल की सुबह 9 बजे ऑक्सीजन खत्म हो गई थी। इससे वहां भर्ती मरीजों की सांसें उखड़ने लगीं। डॉक्टर और मरीजों के घर वालों ने अंबू बैग से ऑक्सीजन देने की कोशिश की, लेकिन कुछ ही मिनट में उखड़ती सांसों के थमने का सिलसिला शुरू हो गया। एक के बाद एक मरीज मरते रहे और डॉक्टर लाचार खड़े रहे देखते रहे। पांच लोगों की मौत हो गई थी।

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