भोपाल:- डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा प्रदेश! व्यापम कांड के आरोपी छात्रों से एमबीबीएस की 93 सीटें खराब, इतने डॉक्टरों का भविष्य खतरे में

भोपाल:- डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा प्रदेश, व्यापम कांड के आरोपी छात्रों से एमबीबीएस की 93 सीटें खराब, इतने डॉक्टरों का भविष्य खतरे में

 

 

 भोपाल:- मध्यप्रदेश में व्यापमं कांड की वजह से डॉक्टरों की कमी हुई थी. डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे प्रदेश को व्यवसायिक परीक्षा मंडल कांड की वजह से 93 डॉक्टर नहीं मिल सके. क्योंकि यह वही छात्र थे जो फर्जी तरीके से पीएमटी पास कर भर्ती हुए थे. जब इस मामले का खुलासा हुआ तो यह डिग्री पूरी होने से पहले ही बर्खास्त कर दिए गए.

कुछ को दोष सिद्ध होने पर सजा भी हो चुकी है.कई के केस सुप्रीम कोर्ट में अभी चल रहे हैं. वहीं 69 डॉक्टरों का भविष्य अभी भी खतरे में है, इन्होंने पढ़ाई तो पूरी कर ली है लेकिन इनके मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन है.अगर यह दोषी पाए गए तो न सिर्फ डिग्री निरस्त होगी बल्कि उन्हें जेल भी जाना पड़ेगा.यह डॉक्टर भी व्यापम कांड के आरोपियों की सूची में है इस तरह गजराराजा मेडिकल कॉलेज में भी व्यापम के कारण 162 प्रभावित हुए.

 

 व्यापम कांड से मेडिकल की स्थिति खराब होने का मलाल तो हर जिम्मेदार को है लेकिन मामला कोर्ट में विचाराधीन होने से कोई अधिकृत रूप से बोलने को तैयार भी नहीं है नाम न छापने की शर्त पर एक निजी अखबार दैनिक भास्कर से वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि 93 छात्रों की बर्खास्तगी से ना सिर्फ जेएएच की व्यवस्थाएं कमजोर पड़ी बल्कि इतने ही होनहार छात्रों को सरकारी कॉलेजों में पढ़ने का अवसर नहीं मिल पाया.

 

दूसरी लहर में जब मध्य प्रदेश कोरोना से जूझ रहा था उस वक्त डॉक्टरों की कमी का एहसास मरीजों के परिजनों के साथ साथ सरकार को भी हुआ. मरीजों की संख्या बढ़ने पर सरकार ने संविदा भर्ती के आदेश तो निकाल दिए लेकिन निर्धारित संख्या के अनुसार डॉ नहीं मिल पाए. संक्रमण काल में डॉक्टरों को 20-20 घंटे की ड्यूटी करनी पड़ी. बड़ी संख्या में डॉक्टरों के संक्रमित होने की वजह से मरीजों का इलाज भी भारी संख्या में प्रभावित हुआ.

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