
भोपाल से गौतम कुमार की रिपोर्ट
कोरोनावायरस (Corona Virus) राजधानी भोपाल (Bhopal) सहित पूरे मध्यप्रदेश में कोहराम मचा रहा है। हर दिन सैकड़ों नए मरीज सामने आ रहे हैं। लेकिन सरकार की लापरवाही दिन-ब-दिन घटने की बजाय और बढ़ती जा रही है। प्रशासन की लापरवाही का आलम यह है कि कोरोना वायरस संक्रमित मरीज खुद ही अपने क्वॉरेंटाइन सेंटर की सफाई कर रहा है। जो मरीज खुद संक्रमित है उसके लिए सफाई करना कितना खतरनाक है इसके साथ ही उसके साथ जो मरीज रह रहे हैं उनके लिए यह कितना खतरनाक है। ताजा मामला भोपाल के चिरायु अस्पताल का है। कोरोना संक्रमित मरीजों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया है कि ना तो यहाँ समय पर कोई साफ सफाई करवाते हैं और नाही इन्हें किसी तरह की व्यवस्था दी जा रही है यहां तक कि मरीज खुद ही सफाई कर रहे हैं।
शिकायत के बावजूद कू सफाई नहीं
दरअसल माजरा यह था कि बार-बार शिकायत करने के बाद भी वार्ड, शौचालय और कॉरिडोर की सफाई नहीं हो रही थी। गंदगी इतनी थी कि उसमें आम-आदमी का रहना मुश्किल हो तो फिर ये तो मरीज हैं। जिन्हें साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। बार-बार शिकायत करने के बावजूद जब कोई सुधार नहीं हुआ तो एक मरीज ने इसका बेड़ा स्वयं ही उठा लिया और सफाई करने लगा। सफाई करने वाला व्यक्ति खुद कोरोना संक्रमित है ऐसे में सफाई करना इनके लिए कितना महंगा पड़ सकता है लेकिन क्या करें जिंदगी में रहने की आदत नहीं है कैसे बैठे रहते। चिरायु अस्पताल में तकरीबन 370 मरीजों का इलाज चल रहा है जबकि 570 मरीज ठीक होकर अपने घर लौट चुके। लेकिन अभी जिन मरीजों का इलाज चल रहा है उनका कहना है कि इससे अच्छा तो हमें घर पर ही छोड़ दिया जाता हम वही उपचार करवा लेते।
क्या कहना है मरीजों का
अस्पताल में भर्ती कुछ मरीजों ने आरोप लगाया है कि यहां पर जो सफाई कर्मी सफाई कर रहे हैं वहीं मरीजों को खाना बांटने का भी काम करते हैं। इतना ही नहीं प्रबंधन का रवैया इस हद तक खराब है कि यहां पर मरीजों के लिए बाकी व्यवस्था तो दूर सैनिटाइजर तक नहीं है। 3 से 4 दिन में शौचालय की सफाई होती है। साफ सफाई की व्यवस्था कितना है इसका अंदाजा आप उसी से लगा लीजिए कि पोछा लगाने के लिए फिनायल तक उपयोग नहीं किया जाता है। जब प्रबंधन से इस चीज की शिकायत की जाती है तो उनका एक ही जवाब होता है कि हमारे पास जितने वर्कर हैं उतना ही तो काम करवाएंगे।
कुछ को दिया जा रहा वीआईपी ट्रीटमेंट
एक मीडिया संस्थान से बातचीत करते हुए मरीजों ने बताया कि इस अस्पताल में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है पुलिस टॉप लेकिन इनमें से कुछ को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जाता है जबकि बाकी मरीजों को एक ही हॉल में तकरीबन 30 बेड लगाकर एक साथ रखा गया है। यहां तक कि उनको बेडशीट तक बदलने के लिए नहीं मिलती है जब खुद हो जाते मांगते हैं तब काफी मशक्कत करने के बाद उन्हें दूसरी बेडशीट उपलब्ध करवाई जाती है।
क्या कहना है अस्पताल प्रबंधन का
प्रबंधन का कहना है कि उनके अस्पताल में 300 मरीजों का इलाज चल रहा। लेकिन पर्याप्त संख्या में उनके पास सफाई कर्मी नहीं है। लेकिन समय पर सफाई होती है खाने का पैकेट भी दिया जाता है ताकि संक्रमण न फैले। साथ ही उनका कहना है कि यहां समय-समय पर सफाई होती रहती है। यानी अगर अस्पताल प्रबंधन की मानें तो भाई मरीज एकदम साफ साफ सफेद झूठ बोल रहे हैं।
बहरहाल कलेक्टर तरुण पिथोड़े ने इस मामले पर जांच करवाने की बात कही है।