छात्र अपना हित तय करने के काबिल नहीं है, इसके लिए वैधानिक संस्था है:- सुप्रीम कोर्ट

छात्र अपना हित तय करने के काबिल नहीं है, इसके लिए वैधानिक संस्था है:- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली/ गरिमा श्रीवास्तव:-सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अशोक भूषण की बेंच परीक्षा टालने की याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें यह बात कही गई कि छात्रों का हित किसमें है यह छात्र तय नहीं कर सकते हैं इसके लिए वैधानिक संस्था है. छात्र अभी इन सब के काबिल नहीं है.

 कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सरकार से यह सवाल किया है कि क्या यूजीसी के निर्देश और मामले में सरकार दखल दे सकती है या नहीं.? सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार सिर्फ दो ही काम कर सकती है, या तो इम्तिहान कराने में खुद को अक्षम बता दें या फिर पिछले परीक्षाओं के आधार पर रिजल्ट घोषित करें.

UGC द्वारा ग्रेजुएशन थर्ड ईयर के एग्जाम 30 सितंबर तक कराने का आदेश देने के मामले में ये सुनवाई हो रही है. याचिका दायर करने वाले छात्राओं का यह कहना है कि दिल्ली और महाराष्ट्र ने जब परीक्षाएं रद्द करा दी है तो अन्य सभी राज्यों में भी परीक्षा रद्द करने की घोषणा की जाए.

 महाराष्ट्र सरकार ने यह बात कहते हुए परीक्षाएं टाल दी थी कि इस महामारी के दौरान परीक्षा कराना संभव नहीं है, इससे कोरोना का खतरा और भी ज्यादा बढ़ सकता है, जिस पर कोर्ट ने कहा है कि क्या सरकार यह बात कह सकती है कि बिना परीक्षा दिलाए सभी को पास किया जाएगा, अगर हम यह मान लेंगे तो किसी को कोई परेशानी नहीं होगी.

 याचिकाकर्ता में एक छात्र ऐसा है जिसकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव है. उसने याचिका में कहा है कि ऐसे बहुत सारे बच्चे होंगे जिनके परिजनों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव होगी. ऐसे में परीक्षाएं कराना खतरे को आगे से बुलावा देने जैसा है.

 

 

 

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