
●1973 में बने लेक्चरर तभी से छूटी नींद
●दिल्ली से मुम्बई तक कराया इलाज।
●नींद गायब लेकिन दैनिक जीवन यथावत।
रीवा/शुभम शुक्ला:-
मध्यप्रदेश के रीवा जिले के रहने वाले रिटायर्ड ज्वाइंट कलेक्टर मोहनलाल द्विवेदी (71 वर्ष) ने चौंकाने वाला दावा किया है।चाणक्यपुरी निवासी मोहनलाल ने मेडिकल साइंस को चुनौती दी है,मेडिकल साइंस कहता है कि एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए 6-8 घण्टों की नीन्द आवश्यक है जबकि मोहनलाल दावा करते हैं कि पिछले 48 सालों में वो एक भी पल भी नहीं सोए इसके बावजूद इससे उन्हें कोई परेशानी नहीं होती उनकी दिनचर्या भी आम इंसानों की तरह ही सामान्य है और वो एकदम स्वस्थ रहते हैं। यही नहीं उनकी बेटी और पत्नी भी दो से तीन घण्टे ही सोती हैं।
1973 में बने लेक्चरर तब से गायब है नींद
मोहनलाल द्विवेदी का जन्म मध्यप्रदेश के त्योंथर तहसील के जकनहाई गाँव में 1 जुलाई 1950 को हुआ था। उन्होंने प्रारम्भिक शिक्षा गाँव मे ही ली उसके बाद रीवा आ गए। उस दौरान भी वह कम ही नींद लेते थे। तब वो रोजाना दो से तीन घण्टे की नींद लेते थे।
मोहनलाल कहते हैं कि 1973 में उनकी लेक्चरर की नौकरी लग गई जिसके कुछ दिन बाद ही जुलाई माह से उनकी नींद गायब हो गई। जिसके बाद वो सरकारी नौकरी छोड़कर रीवा आ गए और रीवा के TRS कॉलेज में संविदा पर प्रोफेसर बन गए। फिर 1974 में MPPSC क्वालीफाई कर नायब तहसीलदार बने और 2001 में ज्वाइंट कलेक्टर बनने के बाद रिटायर हुए।
दिल्ली से मुम्बई तक कराया इलाज,नहीं मिला निदान
मोहनलाल बताते हैं कि शुरुआती दिनों में उन्होंने यह समस्या किसी को नहीं बताई। वो पूरी रात जागकर बिताते लेकिन आँखों मे न जलन होती और न ही अन्य दैनक क्रियाओं पर कोई फर्क पड़ता। कुछ दिन बाद उन्होंने घर में बताया तो घर वालों नें झाड़-फूँक कराया फिर भी नींद नहीं आई तो उन्होंने डॉक्टर को दिखाया। लगातार 4-5 साल तक रीवा,जबलपुर से लेकर दिल्ली,मुम्बई तक के डॉक्टरों को दिखाया कई प्रकार की जाँच कराई लेकिन नतीजा सिफर रहा। उन्होंने आख़िरी बार 2002 में चिकित्सकों से सम्पर्क किया था लेकिन कोई निदान नहीं हुआ
कुछ ऐसी रहती है दिनचर्या
●सुबह 4 बजे उठकर नित्यक्रिया के बाद योगा एक्सरसाइज
●सुबह 7 बजे स्नान के बाद पूजा पाठ
●सुबह 11 बजे नाश्ता/भोजन
●सुबह 12 बजे से शाम 5 बजे तक किताब पढ़ना/अन्य कार्य करना
●शाम 7 से 9 फिर पूजा पाठ
●रात 9 बजे खाना खाना
●रात 10 बजे से TV देखना
●रात बजे से जागते हुए बिस्तर में लेटे रहना