तो "मंत्री" नहीं बनाए जाने के बाद "भाजपा के ये दिग्गज" हो जाएंगे कांग्रेस में शामिल? 5 जिलों में फंसे पेंच…!

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – मध्यप्रदेश में शिवराज कैबिनेट (Shivraj Cabinet) के विस्तार को लेकर अटकलें तेज़ हैं। लेकिन पार्टी में बढ़ रही अंधुरनी अनबन ने सरकार को दिक्कत में डाल दिया हैं। दरअसल, भाजपा (BJP) के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस (Congress) छोड़ भाजपा में शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के समर्थकों को एडजस्ट करने की हैं।
मालूम हो कि मध्यप्रदेश में 230 विधानसभा सीटे (Vidhansabha Seats) हैं। इस हिसाब से मध्यप्रदेश में केवल 34 मंत्री बन सकते हैं। ये माना जा रहा है कि कैबिनेट विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के 8 नेता और मंत्री बन सकते हैं जबकि 2 मंत्री बनाए जा चुके हैं। ऐसे में भाजपा का गणित बिगड़ता हुआ नज़र आ रहा हैं।भाजपा में भी कई दिग्गज ऐसे है जो मंत्री बनने के दावेदार है लेकिन सिंधिया कोटे से आए पूर्व विधायको (MLA) के कारण उनका पत्ता कट सकता हैं।
बता दे कि कैबिनेट विस्तार (Cabinet Expansion) को लेकर सबसे बड़ी मुश्किलें 5 जिलों में है। सागर (Sagar), रीवा (Rewa), ग्वालियर (Gwalior), मंदसौर (Mandsore) और इंदौर (Indore) में जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण बैठने में भाजपा को दिक्कत हो रही हैं।
इंदौर जिले में तुलसी सिलावट (Tulsi Silawat) अभी मंत्री हैं। उनके अलावा, ऊषा ठाकुर, मालिनी गौड़ और रमेश मेंदोला भी दावेदार हैं। ऐसे में अगर किसी एक को मंत्री बनाया जाता है तो नाराजगी बढ़ सकती हैं।
वहीं, ग्वालियर-चंबल से प्रद्युमन सिंह तोमर (Pradhuman Singh Tomar) के अलावा इमरती देवी और यशोधरा राजे सिंधिया भी प्रबल दावेदार हैं।
रीवा जिले में भी कई दावेदार
पूर्व मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) के करीबी माने जाते हैं और विंध्य क्षेत्र में भाजपा के बड़े चेहरे हैं। राजेन्द्र शुक्ल के अलावा, नागेन्द्र सिंह, गिरीश गौतम और दिव्यराज सिंह बड़े दावेदार हैं। राजेन्द्र शुक्ल के सामने मुश्किल ये है कि ब्राह्मण चेहेरे के रूप में नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) को कैबिनेट में जगह मिल चुकी है जबकि गोपाल भार्गव (Gopal Bhargav) प्रबल दावेदार हैं।
इधर, सागर से भी भाजपा के लिए दिक्कत खड़ी हो सकती हैं। यहां से अभी गोविंद सिंह राजपूत (Govind Singh Rajput) मंत्री हैं। जबकि भाजपा के दिग्गज नेता गोपाल भार्गव भी सागर से बड़ा चेहरा माने जाते हैं। पूर्व गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह भी सागर जिले से आते हैं। इसके अलावा प्रदीप लारिया एससी कोटे से और शैलेन्द्र जैन, जैन समाज के कोटे से अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। जिस कारण से भाजपा को सामंजस्य बैठाने में मुश्किल हो रही हैं।
फ़िलहाल शिवराज कैबिनेट में 5 मंत्री हैं। माना ये जा रहा है कि जल्द ही 22 से 24 नेताओं को मंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी। अब मंत्री कौन बनेगा ये तो समय ही बताएगा।




