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प्रशासन के लाखों रूपए स्वाहा, फिर भी पानी को तरस रहे सुक्कम-भुरकुण्डी के निवासी

“द लोकनीति” ने उठाया था सुक्कम भुरकुण्डी ग्राम के ग्रामीण नल-जल के पेयजल का मुद्दा

 ग्रामीण नल-जल योजना में भारी भ्रष्टाचार की सम्भावना, अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी से ग्राम पंचायत के कर्ताधर्ताओं के हौसले बुलन्द

   सिवनी :- सिवनी जिला अन्तर्गत जनपद पंचायत लखनादौन की ग्राम पंचायतें अब भ्रष्टाचार के साथ शासकीय राशि को व्यर्थ में गवाँने के नाम पर लगातार कुख्यात होती जा रही हैं! सम्बन्धित अधिकारियों की अनदेखी या लापरवाही से पंचायतों के सरपंच, सचिव सहित पंचायत से जुड़े लोग शासकीय राशि की जमकर दावत उड़ा रहे हैं।  इन्हें न जाँच की चिन्ता है, न कार्यवाही का भय।
जनता की सुविधा के लिये आने वाली शासकीय राशि इनके और इनके चहेतों के स्वार्थ की भेंट चढ़ रही है, तो वहीं ग्रामवासी आज भी मौलिक सुविधाओं के लिये तरसकर कष्ट भोग रहे हैं।

 अभी तत्काल का मामला ग्राम पंचायत मोहंगाँव (धूमा) का है, जहाँ के आसन्न दो ग्राम सुक्कम-भुरकुण्डी में पेयजल की भयावह कमी को देखते हुये शासन ने ग्रामीण नल-जल योजना के माध्यम से ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल घर-घर पहुँचाने के उद्देश्य से वर्ष 2018 में 472000 की राशि स्वीकृत की थी। इसके लिए ग्राम पंचायत मोहंगाँव धूमा ने माह अप्रैल 2018 से कथित कार्य प्रारम्भ किया है, जिसमें सूत्रों के अनुसार लगभग 350000 की राशि व्यय कर दी गई है, हालांकि पंचायत द्वारा इसका अधिकृत ब्यौरा पंचायत दर्पण की आधिकारिक बेबसाइट से अभी तक छिपाया गया है लेकिन आज दिनाँक तक ग्रामीणों को एक बून्द भी पेयजल उक्त नल-जल योजना से नहीं मिला है।  ग्रामीण आज भी खतरे से भरे कुओं से गन्दा पानी लेने को मजबूर हैं।

 गौर करने वाली बात यह है कि इन दो ग्रामों में पेयजल संकट दूर करने के लिये पूर्व में वर्ष 2003-04 में लोक स्वास्थ्य याँत्रिकी विभाग द्वारा सार्वजनिक कूप बनाकर, उससे लेकर पाइपलाइन का जाल पूरे ग्राम में फैलाया गया था; जिसके माध्यम से घर-घर पानी पहुँचता था यह योजना कई वर्षों तक सक्रिय रही, एवं कालान्तर में बन्द पड़ गई; लेकिन ये पाइपलाइन स्त्रोत कुँये से लेकर ग्राम में यथावत बिछी हुई है।

खैर सबसे बड़े कमाल की बात तो ये है कि दिनाँक 21/01/2020 को “द लोकनीति” में प्रकाशित समाचार से हरकत में आई पंचायत मोहंगाँव धूमा ने लीपापोती करते हुये कुछ प्लास्टिक पाइप वर्षों पुरानी उक्त नल-जल योजना के पाइपों से जोड़कर उसकी सप्लाई ग्राम के दो कुँओं में सीधे डाल दी गई है।  जिससे ये दिखावा किया जा सके कि उक्त योजना में सुधार करके नल-जल योजना सुचारू कर दी गई है। जबकि हाल में स्वीकृत राशि से सम्पूर्ण नल-जल योजना का सुधार, मरम्मत कर घर-घर पेयजल उपलब्ध कराना था.
 सुक्कम-भुरकुण्डी के ग्रामीणों के आरोपों के आधार पर आज पुन: “द लोकनीति” की टीम ने पड़ताल की तो ये बात खुलकर सामने आई कि पंचायत ने समाचार प्रकाशन से भयभीत होकर अपनी कारगुजारियाँ व शासन की राशि के दुरुपयोग पर पर्दा डालने के लिये हाल ही में ये लीपापोती की है क्योंकि पिछले समाचार संकलन के समय ऐसा कोई कार्य धरातल पर नहीं था. नल-जल योजना पर न कोई सुधार हुआ था, न ही उक्त कुँओं तक कोई पाइपलाइन ही थी। वैसे भी इस दिखावे से न शासन की बेशकीमती राशि की बर्बादी छिप रही है, न ही लोगों को शुद्ध पेयजल घर मोहल्ले तक मिल पा रहा है।  आज भी ग्रामीण जान हथेली पर लेकर खतरनाक कुँओं से गन्दा पानी पीने पर मजबूर हैं! क्या 472000 की भारी-भरकम राशि से पुरानी नल-जल योजना में सुधार करके घर-घर पानी नहीं पहुँचाया जा सकता है? ये हो सकता है, यदि पंचायत मोहंगाँव धूमा के जिम्मेदार ईमानदार जनसेवक होते! यदि शासकीय राशि को निज स्वार्थ की भेंट चढाना है तो ऐसे हथकंडे ही अपनाये जायेंगे।  इस विषय को उठाने पर आला अधिकारी जाँच की बात तो कह रहे हैं, पर क्या वाकई जाँच होगी, होगी तो आखिर कब होगी; और क्या ईमानदारी से सूक्ष्म जाँच हो पायेगी।  यदि सही निष्पक्ष जाँच हो तो दोषियों पर कार्यवाही भी होंगी और जनता को शासन की योजना का लाभ भी मिलेगा।

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