
सिहोरा : 25 गांव के बीच PHC ,40 वर्ष पुराना भवन ,सरकार ने नहीं भेजें डॉक्टर इलाज़ के लिए तरस रहे ग्रामीण
- कूम्ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पैरामेडिकल स्टाफ़ और डॉक्टर की नहीं हुई पदस्थापना
- इमरजेंसी डिलीवरी पेशेंट को देखने के लिए पर्याप्त नर्सों का स्टाफ नहीं
- प्राइवेट वाहनों पर पैसा ख़र्च कर 22 किलोमीटर सिहोरा ले जाना पड़ता हैगंभीर मरीजों को उपचार के लिए
द लोकनीति डेस्क सिहोरा
एकतरफ़ मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार बड़े बड़े विज्ञापनों से जनता को अपनी योजनाए का डिंडोरा पीट रही है वही दूसरी तरफ़ ग्रामीण क्षेत्रों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं को तरस रहे है। भारत सरकार कोरोना काल में हर राज्य को स्वास्थ्य सेवाएं में पैसा भेज रही है उसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र में जनता इलाज़ के लिए भटक रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकार ने करोड़ो रूपये ख़र्च कर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC ) तो खोल दिए लेकिन यहां पर न तो डॉक्टरों की पदस्थापना हुई और न ही पैरामेडिकल स्टाफ़ की। किसी के बीमार होने या इमरजेंसी डिलीवरी होने पर पैसा ख़र्च कर प्राइवेट वाहनों से इलाज के लिए लम्बी दुरी तय करनी पड़ती है।
ताज़ा मामला सिहोरा तहसील मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्ही सतधारा का है। जहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बद से बदतर में है । 25 गांव के बीच कूम्ही स्वास्थ्य केंद्र करीब 40 वर्ष पुराना भवन तो बना दिया गया ,लेकिन आज तक यहां डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ की पदस्थापना स्वास्थ्य विभाग द्वारा नहीं की गई । इमरजेंसी सेवाओं और डिलीवरी पेशेंट को देखने के लिए पर्याप्त नर्सों का स्टाफ नहीं है। 24 घंटा में 3 -4 डिलीवरी एकमात्र नर्स अनीता कुशवाहा की जिम्मेदारी में होती है ।
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही पड़ रही 25 गाँव पर भारी
क्षेत्रके लोगों गजेंद्र दीक्षित, जयकुमार पांडे, सदन सोनी, कैलाश पटेल, सीता पटेल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के कुम्ही सतधारा के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। यहां स्वास्थ्य विभाग की अव्यवस्था के कारण गंभीर मरीज़ (serious patient ) को लाने ले जाने के लिए एंबुलेंस व्यवस्था नहीं है । ऐसे में आसपास के गंभीर बीमार मरीजों को इलाज़ के लिए ज़्यादा पैसा ख़र्च कर निजी वाहनों की व्यवस्था कर 22 किलोमीटर दूर सिहोरा सिविल अस्पताल ले जाना पड़ता है।
PHC पहुँचते हैं मरीज़ लेकिन नहीं मिल पाता इलाज़
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्ही में गंभीर मरीज़ उपचार की उम्मीद पर पहुंचते तो जरूर है लेकिन डॉक्टरो और पैरामेडिकल स्टाफ़ नहीं होने से उन्हें बिना इलाज के लौटना पड़ता है। ऐसे में 25 गाँव के ग़रीब परिवार बेहद परेशान है क्योंकि पैसे से सक्षम लोग अपना इलाज़ तो बड़े निजी अस्पतालों में करा लेते है लेकिन ग़रीब का सहारा तो सरकारी अस्पताल ही होता है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्ही सतधारा में छोटे-छोटे 7 कमरे ऑफिस रूम, ड्रेसिंग रूम, एक भर्ती रूम, एक छोटा कमरा डिलीवरी रूम, ओपीडी रूम, दवा स्टोर ,आदि भवन छोटा होने के कारण संकीर्णता को लेकर लोगों के उपचार और डिलीवरी कार्य पर परेशान होना पड़ता है । स्वास्थ्य केंद्र कुम्ही में छोटे कमरों के साथ पलंग व्यवस्था, कर्मचारी व्यवस्था, पानी व्यवस्था, साफ सफाई व्यवस्था, उपचार उपकरण व्यवस्था, बाउंड्री वाल व्यवस्था, कराने की मांग किया है।
इनका कहना
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुम्ही सतधारा में डॉक्टर ,नर्स स्टाफ की कमी है। उच्च अधिकारियों से चर्चा कर PHC कुम्ही में आवश्यक स्टाफ की तैनाती की जाएगी।
डॉक्टर दीपक गायकवाड (बीएमओ मझगवां )