
शिवराज सरकार ने सिर्फ पैसे देने की “तैयारी” की, समय पर उपलब्ध नहीं कराए, वरना आज बच सकती थी कोरोना वॉरियर शुभम की जान
सागर/गरिमा श्रीवास्तव :- मध्यप्रदेश में कोरोना मरीजों को लगातार सेवा देने वाले शुभम की कोरोना से मौत हो गई. वह महज 26 वर्ष के थे. इतनी कम उम्र में ही उन्होंने कई कोरोना मरीजों की जान बचाई पर वह खुद को नहीं बचा सके…
शुभम उपाध्याय के इलाज के लिए मध्यप्रदेश सरकार ने ₹1 करोड़ देने की घोषणा की थी पर उससे पहले ही शुभम ने दम तोड़ दिया..
बता दे कि शुभम उपाध्याय ने बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मार्च 2020 में डॉक्टरी की डिग्री पूरी की थी. उनकी पहली नियुक्ति को कोविड सेंटर में ही हुई थी..
अगर सरकार समय रहते बेहतर इलाज के लिए रुपए मुहैया कराती तो बच सकती थी शुभम की जान:-
शुभम उपाध्याय के परिवार वालों ने शुभम की बिगड़ती हालत को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार से बेहतर इलाज के लिए रुपयों की मांग की.
जिसके पास सरकार ने घोषणा किया कि वह शुभम के इलाज के लिए 1 करोड़ रुपए देंगे.. पर मौत के पास समय नहीं था कि वह शिवराज की घोषणा पूरी होने तक इंतजार करें. वह आई और शुभम को दबोच ले गई..
अगर शिवराज सरकार द्वारा शुभम को इलाज के लिए समय पर रुपए उपलब्ध कराया जाता तो उन्हें अच्छे बड़े अस्पताल में भर्ती कराकर बचाया जा सकता था..
पर सरकार को तैयारी करने में ही लंबा समय लग जाता है, और बस पर सरकार की तैयारियों के बीच शुभम की जान चली गई जिसने अपनी जान की परवाह किए बगैर कोरोना मरीजों की सेवा में दिन रात एक कर दिये।।
28 अक्टूबर को संक्रमित हुए थे शुभम:-
बता दे कि बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद शुभम उपाध्याय की पहली नियुक्ति सीधे कोविड सेंटर में हुई थी.
वहां आते ही शुभम जी जान से मरीजों की सेवा में जुट गए. और अपनी जान को हथेलियों पर रख वह सेवा भाव में जुट गए..
जुमलेबाजी की सरकार से एक ऐसे व्यक्ति की भी समय रहते मदद नहीं हो पाई जिसने बेहद कम उम्र में कई लोगों की जान बचाई..