नियमितीकरण पॉलिसी तो दूर शिवराज सरकार अब तक 600 फाॅलेन आउट को भी नहीं ले सकी है व्यवस्था में, कब होगा उद्धार?

नियमितीकरण पॉलिसी तो दूर शिवराज सरकार अब तक 600 फाॅलेन आउट को भी नहीं ले सकी है व्यवस्था में 
 'अब तक केवल नव चयनितो के परिवीक्षा अवधि में ही ट्रांसफर करने पर ज्यादा ध्यान दिया गया है'

' पूर्व कमलनाथ सरकार में इनके आंदोलन के दौरान भाजपा के वर्तमान सीएम सहित कई कद्दावर नेता इनके आंसुओं पर राजनीति करने आए थे '

भोपाल/गरिमा श्रीवास्तव :- पूर्व कमलनाथ सरकार में प्रदेश के महाविद्यालयीन अतिथि विद्वानों के नियमितीकरण और सेवा बहाली के आंदोलन के दौरान वर्तमान भाजपा सरकार के सीएम शिवराज सिंह चौहान और कई कद्दावर मंत्री और नेता इनके आंसुओं पर राजनीति करने के लिए इनके पंडाल में आए थे। विपक्ष में रहकर विधानसभा में इनके लिए मुद्दा भी उठाया था। लेकिन अब वहीं भाजपा सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डाॅ. मोहन यादव वर्तमान विधानसभा सत्र में इनके लिए नियमितीकरण पॉलिसी और सेवा बहाली के लिए कई विधायकों द्वारा लगाए गए तारांकित प्रश्नों के जवाब कोई योजना नहीं कहकर दे रहे हैं।
वहीं इनके भविष्य के लिए कैबिनेट से रास्ता निकालना तो दूर 15 महीने से नियमित भर्ती की नियुक्ति के कारण 600 के करीब फाॅलेन आउट हुए अतिथि विद्वानों को भी व्यवस्था में नहीं लिया गया है। जबकि अब तक शिवराज सरकार ने भी परिवीक्षा अवधि में नव चयनितो के ट्रांसफर करने में ही सबसे अधिक ध्यान दिया है। आगामी अप्रैल माह में तो भारी मात्रा में ट्रांसफर होने की संभावना है। जिसके कारण कई अतिथि विद्वानों को बेरोजगारी का सामना करना पड़ेगा।
ज्ञातव्य है कि इस शोषणकारी व्यवस्था की सेवा शर्तों ने इन नेट, सेट, एमफिल, पीएचडी जैसी योग्यताधारी उच्च शिक्षितो को किसी भी प्रकार की सहूलियत नियमित फैकल्टी की तरह अब तक नहीं दी गई है। वर्षो से दैनिक वेतन भोगी, बंधुआ मजदूर, कारपेन्टर आदि से भी कम मानदेय लेकर दूर दराज के महाविद्यालयों में सेवा देते आए हैं। कई उच्च शिक्षित महिलाएं भी फाॅलेन आउट होने के कारण बेरोजगार बैठी हैं। अनेको अतिथि विद्वान 50 से 55 साल तक की आयु के हो चुके हैं, फिर भी सरकार इनकी ओर ध्यान नहीं दे रही है।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष का इस बारे में कहना है कि, ' शिवराज सरकार से हम निवेदन करते हैं कि वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र में ही चर्चा करके अतिथि विद्वानों के भविष्य को संवारने का निर्णय लेने की कृपा करें, अन्यथा अप्रैल माह से एक बार फिर शाहजहांनी पार्क की तर्ज पर आंदोलन देखने को मिलेगा। '
 संघर्ष मोर्चा के ही मीडिया प्रभारी ने इस बारे में बताया है कि, ”  अतिथि विद्वानों की उम्र, सेवा कार्य और उनके अनिश्चित भविष्य को देखते हुए शिवराज सरकार को शीघ्र ही उचित निर्णय ले लेना चाहिए। क्योंकि हमने वर्षों से अल्प मानदेय में ही जीवन गुजारा है। “

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