सीहोर घटना : कैलाश विजयवर्गीय ने CM से पूछे कड़े सवाल, कहा बताते हुए हो रही है पीड़ा 

भोपाल : हालही में मध्यप्रदेश के सीहोर ज़िले में रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन किया गया था और इसमें लाखों श्रद्धालुओं के आने की वजह से भोपाल इंदौर हाईवे पर 25 किलोमीटर लंबा जाम लग गया था। इसके चलते प्रशासनिक व्यवस्थाएं अस्त-व्यस्त हो गई थी और अंततः कथा वाचक प्रदीप मिश्रा को अपना कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा था। 

कार्यक्रम समाप्ति की घोषणा करते समय पंडित प्रदीप मिश्रा की आंखों में आंसू थे। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। 
बताया जा रहा है कि उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के दबाव के चलते वह कार्यक्रम समाप्त कर रहे हैं। वहीं, मुख्यमंत्री शिवराज के गृह जिले सीहोर में कथा वाचक प्रदीप मिश्रा के साथ घटा घटनाक्रम सरकार के लिए सर दर्द हो गया है।

जहां एक तरफ विपक्ष ने शिवराज सरकार का घेराव करना शुरू कर दिया है तो वहीं भाजपा के नेता भी सीएम को पत्र लिखकर पंडित प्रदीप मिश्रा के साथ हुए व्यवहार को लेकर पीड़ा व्यक्त कर रहें है। बता दे कि इस मामलें में अब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखा है। 

”कैलाश विजयवर्गीय ने पत्र में लिखा है कि “मेरा आपसे यही आग्रह है कि मेरे और आप जैसे सनातनी तणो शिव के अनुयाई हैं। भगवान शिव ने जैसे विषपान किया वैसे हम भी कर लेंगे। किंतु शिवरात्रि के महापर्व पर देश भर से आए शिव भक्तों की क्या गलती थी? गलती तो शुद्ध रूप से सीहोर प्रशासन की है। सीहोर प्रशासन को जाकर श्री प्रदीप मिश्रा जी से माफी मांगनी चाहिए और कथा प्रारंभ हो जाना चाहिए।

सीहोर का प्रशासन इस तरह से निकृष्ट साबित होगा, यह कल्पना से परे है। मेरी दृष्टि में शिवराज जी के राज में प्रशासन की गलती की सजा शिवभक्त क्यों भोगे। मुझे विश्वास है आप प्रशासन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे और कथा पुनः प्रारंभ हो, ऐसा प्रयास करायेगे।”

कैलाश विजयवर्गीय ने लिखा की – सीहोर जिला प्रशासन की अकर्मण्यता से मेरे जैसे कई सणनातनियो को आघात पहुंचा है। विगत 17 वर्षों से आप इस प्रांत के मुखिया हैं। आखिर ऐसी कौन सी विपदा आ गई थी कि पंडित प्रदीप मिश्रा जी पर इतना दबाव बनाया गया कि उन्हें भारी मन से कथा को समाप्त करना पड़ा।” कैलाश ने पत्र में लिखा है कि “शिवराज जी, सीहोर के अकर्मण्य प्रशासन के कारण आपकी छवि पर भी असर पड़ रहा है। आपको यह सब अवगत कराने में कष्ट और पीड़ा भी हो रही है। 

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