देश के 04 शहरों में एंटीबायोटिक पर रिसर्च, उज्जैन भी शामिल

उज्जैन/अंजली कुशवाह: दुनिया के 11 देशों में एंटीबायोटिक पर रिसर्च चल रही हैं. इस रिसर्च पर भारत के 4 शहरों में भी प्रयोग चल रहा. इस रिसर्च को लेकर भारत के 4 शहरो में एक नाम मध्य प्रदेश के उज्जैन का भी हैं. यह मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात हैं. इस रिसर्च के बाद किसी भी मरीज को एंटीबायोटिक देने के पहले डॉक्टर यह जान सकेंगे कि मरीज को बुखार में कौन सी दवा सबसे ज्यादा कारगर है. जिससे मरीजों को सही एंटीबायोटिक दे सकेंगे और मरीज को साइड इफेक्ट भी नहीं होगा. फ़िलहाल वर्तमान में आमतौर पर एंटीबायोटिक दवा लेने पर उल्टी व दस्त जैसी शिकायतें होने लगती हैं.

उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में 21 सितंबर से शुरू हुई रिसर्च

मिली जानकारी के मुताबिक इसके लिए उज्जैन के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में 21 सितंबर से रिसर्च शुरू हो गई है. रिसर्च केंद्र सरकार की ओर से कराई जा रही. रिसर्च की रिपोर्ट एक साल के बाद ICMR (इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) को सौंपी जाएगी. यह पहला मौका है, जब देशभर में लागू होने वाली जांच और ट्रीटमेंट प्लान की रिसर्च उज्जैन में की जा रही है. ये सितंबर 2022 तक चलेगी. इसमें बुखार के मरीजों के इलाज व कई प्रकार की जांच को शामिल किया है. रिसर्च देश के 4 शहरों में की जा रही है, जिसमें उज्जैन भी शामिल है.

दर्ज हो रहा हैं मरीजों का रिकॉर्ड

ICMR ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को एक ऐप के राइ‌ट्स दिए हैं. इसमें जितने भी मरीजों की जांच होगी, उनका रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है, चूंकि यह रिसर्च देश के 4 शहरों में की जा रही है, इसलिए सभी जगह के डेटा की स्टडी की जाएगी. इस आधार पर पता लगाया जाएगा कि देश में कितने तरह की बैक्टीरियल इंफेक्शन से बुखार आता है. कितने वायरल इंफेक्शन हैं. उन पर कौन सी एंटीबायोटिक दवा कारगर रही. इसके आधार पर बुखार को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक देने की गाइडलाइन तय की जाएगी.

 

रिसर्च के रिजल्ट्स से मरीजों को मिलेगा फायदा

रिसर्च में शामिल मेडिकल कॉलेज के शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष पाठक ने बताया कि रिसर्च में पता लगाया जा सकेगा कि किस बुखार के लिए कौन सी जांच जरूरी है. आने वाले दिनों में रिसर्च के रिजल्ट्स से मरीजों को फायदा मिलेगा. उन्हें अलग-अलग जांचें नहीं करवाना होंगी. मरीज में बैक्टीरियल इंफेक्शन व वायरल का पता लगाकर उचित एंटीबायोटिक व दवाइयों का चयन कर बीमारियों का सही इलाज किए जाने वाले टेस्ट पर भी लगाम लगेगी.

कौन- कौन कर रहे हैं ये रिसर्च

यह रिसर्च आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग व शिशु रोग विभाग में की जा रही है. यह रिसर्च शिशु रोग विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष पाठक, मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. आशीष शर्मा व पैथालॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. मंजू पुरोहित के साथ लैब टेक्नीशियन व सोशल साइंटिस्ट तथा डेटा कलेक्शन के एक्सपर्ट मिलकर कर रहे हैं. इसमें रोजाना 15 मरीजों की जांच की जा रही है.

केंद्र सरकार की पहल पर IMCR और FIND (फाउंडेशन ऑफ न्यू इनोवेशन डायग्नोस्टिक)/ ये रिसर्च करा रही है. यह पहला मौका है जब देश में पहली बार उज्जैन में बैक्टीरियल इंफेक्शन व वायरल पर रिसर्च की जा रही है. इस रिसर्च में दुनिया के 11 देश भाग ले रहे हैं. रिसर्च में आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज उज्जैन के अलावा PIG चंडीगढ़, IMCR कोलकाता और छत्तीसगढ़ के गनियारी अस्पताल भी इस रिसर्च में शामिल हैं.

किन देशों में की जा रही हैं रिसर्च

यह रिसर्च मुख्य रूप से एशियाई और अफ्रीका के 11 देशों में हो रही है. एशियाई देशों में भारत सहित नेपाल, थाईलैंड, म्यांमार, श्रीलंका, वियतनाम शामिल हैं. जबकि अफ्रीकी देशों में घाना, युगांडा, बर्किना फासो, नाइजिरिया और साउथ अफ्रीका देश शामिल हैं.

बता दें कि इस रिसर्च को लेकर भारत के 4 शहरो में एक नाम मध्य प्रदेश के उज्जैन का भी हैं. यह मध्य प्रदेश के लिए गौरव की बात हैं.

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