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मध्यप्रदेश में लगेगा राष्ट्रपति शासन? राज्यपाल और कमलनाथ आए आमने सामने

भोपाल से खाईद जौहर की रिपोर्ट – मध्यप्रदेश में चल रहा हाईवोल्टेज ड्रामा थमने का नाम ही नहीं ले रहा हैं। मुख्यमंत्री कमलनाथ और राज्यपाल लालजी टंडन आमने सामने आ गए हैं। दरअसल, राज्यपाल लालजी टंडन ने कमलनाथ सरकार को निर्देश दिए थे की वो 16 मार्च को बहुमत साबित करे, लेकिन सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया। ऐसे में फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ। 

इसी बीच राज्यपाल लालजी टंडन ने ने दोबारा आज यानी 17 मार्च, मंगलवार को बहुमत साबित करने के निर्देश दिए हैं। राज्यपाल ने सीएम कमलनाथ को चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा गया है कि सरकार 17 मार्च को विधानसभा में फ्लोर टेस्ट करवाए, अगर ऐसा नहीं हुआ तो माना जाएगा कि सरकार को सदन में बहुमत हासिल नहीं हैं। 

राज्यपाल की चिट्टी का सीएम कमलनाथ ने मंगलवार को जवाब भी चिट्ठी से ही भेजा। कमलनाथ ने कहा कि राज्यपाल का 17 मार्च को ही बहुमत साबित करने का आदेश असंवैधानिक हैं। 

सीएम कमलनाथ ने फिर राज्यापल को पत्र लिखा और कहा कि, 40 वर्ष के राजनीतिक जीवन में कभी मुझ पर पहली बार संसदीय मर्यादाओं का पालन ने करने का आरोप लगा हैं। इसस मैं दुखी हूं। मेरी ऐसी कोई मंशा नहीं थी, यदि आपको ऐसा लगा तो मैं खेद व्यक्त करता हूं। पत्र में सीएम ने साफ किया कि कोरोना वायरस अलर्ट के चलते विधानसभा का सत्र तुरंत स्थगित करना पड़ा। 

बता दे कि राज्यपाल ने सीएम कमलनाथ को पत्र में लिखते हुए कहा था कि यह खेद की बात है कि आपने मेरे द्वारा आपको दिए गए समय अवधि में अपना बहुमत सिद्ध करने की बजाय यह पत्र लिखकर विश्वास मत प्राप्त करने एवं विधानसभा में फ्लोर टेस्ट कराने में अपनी असमर्थता/आनाकानी की हैं। राज्यपाल की इसी बात का जवाब सीएम कमलनाथ ने दिया हैं। 

बात दे कि सीएम कमलनाथ ने पत्र में यह भी लिखा है कि 15 महीनों में कई बार मैं अपना बहुमत साबित कर चुका हूं। विपक्ष अगर चाहता है तो अविश्वास प्रस्ताव ला सकता हैं। कांग्रेस के 16 विधायकों को बेंगलुरु में बंधक बनाकर रखा गया है, उनके आए बिना बहुमत साबित कराना असंवैधानिक होगा।

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