
- शराबंदी को लेकर उमा भारती ने फिर दिया बड़ा बयान
- पिछड़े और एससी के लोग शराब से ज्यादा बर्बाद
- प्रदेश सरकार को दिया ये सुझाव
भोपाल/खाईद जौहर : मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा की फायर ब्रांड नेत्री उमा भारती ने एक बार फिर शराबंदी को लेकर अपनी बात रखी है। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी बात कही। उमा भारती ने एक के बाद एक ट्वीट करते हुए शराबंदी को लेकर अपनी बात रखी,जिस पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।
उमा भारती ने ट्वीट करते हुए लिखा की – मेरे भोपाल स्थित निवास पर दिनांक 18 सितंबर 2021 को आयोजित प्रेस कॉन्फ़्रेन्स में 15 जनवरी, 2022 के बाद मध्य प्रदेश में शराब बन्दी अभियान में शामिल होने के मेरे वक्तव्य के बाद इन पांच दिनों में जो प्रतिक्रिया हुई, मैं उन पर क्रमशः अपने भाव व्यक्त करती हूँ।
उन्होंने लिखा की – पिछड़े वर्गों के 7-8 लोगों के प्रतिनिधि मण्डल से संवाद करते समय मेरी असंयत भाषा के प्रयोग का चोरी से वीडिओ बनाकर फिर उसकी क्लिप बनाकर कोंग्रेस ने अधिकृत तौर पर जारी किया। उससे तो ऐसा लगता है कि शराब बंदी की गम्भीरता से लोगों का ध्यान हटाने के लिये क्या मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी शराब लॉबी की बी टीम का काम करेगी ?
शराब बंदी से अवैध शराब की बिक्री बढ़ेगी ऐसा बोलने से पहले गुजरात एवं बिहार का अध्ययन करना चाहिये। गुजरात में भाजपा की एवं बिहार में एनडीए की सरकार हैं, वहाँ पर शराब बंदी है एवं वहाँ के मुख्यमंत्रियों को इस पर गर्व है।
पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती यही नहीं रुकी उन्होंने आगे लिखा की – अवैध एवं ज़हरीली शराब पर रोक लगाना, राज्य शासन के लॉ एंड ऑर्डर की जिम्मेदारी है।
मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री एवं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतोगुणी एवं दृढ़ निश्चयी व्यक्ति हैं, यही मेरे विश्वास का कारण हैं। मध्य प्रदेश में भी गुजरात की तरह बहुत बड़ी संख्या में आदिवासी हैं। जैसे गुजरात ने अपनी शराब बंदी जारी रखते हुए आदिवासियों की परम्पराओं का ध्यान रखा है हम भी उसी तर्ज़ पर मध्य प्रदेश में पूर्ण शराब बंदी कर सकते हैं ।
उमा भारती ने कहा कि बिहार जो की मध्य प्रदेश से ज़्यादा आबादी का एवं ज़्यादा पिछड़ा राज्य है, जब शराब बंदी से राजस्व की हानि के उन्होंने भी विकल्प निकाल लिए तो हम तो कर ही सकते हैं। मध्य प्रदेश में पिछड़े एवं एससी, एसटी वर्ग 92 % है तथा इनमें से अधिकतर पिछड़े एवं एससी समुदाय के लोग ही शराब की बुरी लत के कारण बर्बादी, बीमारी, पिछड़ापन एवं ग़रीबी के शिकार हैं। इन वर्गों की महिलाओं की संख्या करोड़ों में हैं उनके तो जीवन के सभी कष्टों का कारण ही उनके घर के पुरुषों का शराबी होना है। जिस दिन हम शराब बंदी कर देंगे तभी इन वर्गों का कल्याण होगा।
बता दे कि ये पहला मौका नहीं है जब उमा भारती ने शराबबंदी को लेकर अपनी बात रखी हो, इस से पहले भी उन्होंने शराबबंदी को लेकर अपनी कही थी। हालही में उमा भारती ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा था कि, ‘शिवराज जी और वीडी शर्मा जी का मानना है कि जागरूकता अभियान से शराबबंदी की जा सकती है। मेरा माना है कि यह बिना लट्ठ के नहीं होगा। मैं 15 जनवरी तक लोकतंत्र का पालन करूंगी। शराबबंदी के लिए जागरूकता अभियान से काम चलाऊंगी। यदि फिर भी लोग नहीं माने तो सड़क पर उतर जाऊंगी।’