
कर्ज में सुबह होती है, कर्ज में शाम होती है- जीतू पटवारी,
समझिए बजट का सार
भोपाल/राज राजेश्वरी शर्मा: बजट भाषण पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए विधायक जीतू पटवारी ने कहा, मैं सरकार के पूरे बजट का सार केवल एक कविता के रूप में यहां कहना चाहता हूं। उन्होंने बजट के सार में कर्ज में दिन-प्रतिदिन डूबते मध्यप्रदेश का ज़िक्र किया है। जिसमें प्रदेश के झूठ, बेरोज़गारी की बढ़ती दर, झूठी आशा, बढ़ती महँगाई और आमजन की तमाम परेशानियों का उल्लेख किया है।
उनकी कविता कुछ इस प्रकार है:
कर्ज़ में सुबह होती है… कर्ज में शाम होती है, मेरे प्रदेश की किस्मत यूं ही तमाम होती है। इनका बजट आता है सब का बजट बिगड़ जाता है, जाकर पूछो उस गरीब से वह अब घर कैसे चलाता हैं। सरकार को जगाने की हर कोशिश नाकाम होती है, कर्ज में सुबह होती है कर्ज में शाम होती है। ना बिजली के बिल में राहत ना बच्चों की फीस में कमी, ना ईएमआई पर ब्याज माफ, न मजदूरों की खेतों में डाली मनी। यह सरकार झूठ की माला पिरोती है, कर्ज़ में सुबह होती है कर्ज में शाम होती है।
60 करोड़ का ब्याज रोज़ जनता चुकाती है, तब कहीं जाकर जनादेश की खरीदी हो पाती है। गिरवी रख दे जो प्रदेश को सरकार नहीं ये पनौती है, कर्ज में सुबह होती है कर्ज़ में शाम होती है। बंद करो झूठ-लूट का तमाशा बंद करो कर्ज लेना बेतहाशा, बंद करो देना झूठी आशा बंद करो प्रदेश का सत्यानाशा। चोरी की ये सरकार रोज विश्वास मत खोती है, भारत माता रोज़ रोती है, कर्ज़ में सुबह होती है कर्ज़ में शाम होती है।
पटवारी जी ने इसके बाद एक जिला एक उत्पाद और सीएम राइस योजना के बारे में भी कहा कि मेरा वित्त मंत्रीजी से अनुरोध है कि बिना पैसे के प्रोत्साहन के, डंडे के बल पर एक जिला एक उत्पाद योजना लागू नहीं की जा सकती है। इसमें किसानों को फसल लगाने के लिए राशि का प्रावधान करना चाहिए अन्यथा जैसे कृषि कानून लागू करना चाहते हैं वैसे करेंगे तो विरोध होगा।