
- चंबल घाटी अपने अंदर प्रभावशाली इतिहास को समेटे हुए है। और इतिहास के साथ साथ यहां की राजनीति भी बड़ी प्रभावशाली है।
- आज इस क्षेत्र में दो सबसे बड़े प्रभावशाली राजनेता हैं एक केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और दूसरे ज्योतिरादित्य सिंधिया।
मध्यप्रदेश/भोपाल – मार्च से पहले दोनों अलग अलग दल के नेता थे लेकिन आज दोनों एक ही पार्टी के नेता हैं। क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मार्च में अपनी ही कांग्रेस पार्टी से खफा होकर कमलनाथ सरकार गिरा दी और अपने लगभग दो दर्जन विधायक लेकर पहुंच गए भारतीय जनता पार्टी में।
कांग्रेस सरकार गिराने और भाजपा सरकार बनाने में सिंधिया की भूमिका का तोहफा उन्हें मिल गया और मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बन गए लेकिन अब अहम सवाल तोमर को सिंधिया के साथ रहने का है क्या दोनों एक ही क्षेत्र में एक-दूसरे को सहयोग कर पाएंगे ?,क्या एक दूसरे के साथ मिलकर एक ही क्षेत्र में अपना दबदबा कायम रख पाएंगे?
क्योंकि सिंधिया की भाजपा में आने की चर्चाओं के साथ-साथ यह भी चर्चा जोरों पर थी कि क्या तोमर सिंधिया को आगे बढ़ने देंगे? लेकिन अभी जिस तरीके से भाजपा में सिंधिया का खास ख्याल रखा जा रहा है चाहे वो प्रदेश कार्यकारिणी की सूची में सिंधिया समर्थकों को जगह देना हो या प्रभारी मंत्रियों के जिले तय करते वक्त सिंधिया के क्षेत्र वाले जिलों में सिंधिया समर्थक मंत्रियों की तैनाती हो सभी जगह सिंधिया और सिंधिया के समर्थकों का ख्याल रखा गया लेकिन वही तोमर ने अपने संसदीय क्षेत्र मुरैना में अपने समर्थक मंत्री भारत सिंह कुशवाह की तैनाती करके जता दिया कि वह अभी फीके नहीं पड़े हैं।
और ये बात भी सभी जानते हैं कि तोमर सीधे सीधे सिंधिया से लड़ाई मौल नहीं लेंगे क्योंकि वे सियासत के बेहद मंझे हुए खिलाड़ी हैं वहीं सिंधिया भी जानते हैं कि तोमर को नाराज करके वो भाजपा में रहकर सहज नहीं रह पाएंगे। अब देखना दिलचस्प होगा कि चंबल की राजनीति में दोनों नेता अपने पैर कितने पसारते हैं और कौन किसके काम में टांग अड़ाता हैं।