
मध्यप्रदेश/भोपाल – सरकार ने एक आदेश जारी कर नान पीएससी यानी विभागाध्यक्षों द्वारा की जाने वाली भर्तियों में सेलरी कट का फार्मूला लगा दिया है। इसमें नई भर्ती वाले कर्मचारियों को पहले साल में 70 फीसदी, दूसरे साल में 80 फीसदी, तीसरे साल में 90 फीसदी और चौथे साल में 100 फीसदी यानी पूरा वेतन मिल पाएगा। इसमें प्रत्येक कर्मचारी को तीन साल में 2.50 लाख रुपए का नुकसान होगा।
प्रदेश में इस तरह का यह पहला मामला है जब अफसरों और कर्मचारियों की भर्ती में यह भेदभाव किया गया हैं।
बता दे कि राज्य सरकार ने 2020 फरवरी के बाद भर्ती हुए 5000 कर्मचारियों की 30 फीसदी सेलरी कट कर 500 करोड़ रुपए की बचत की आई। इस साल प्रदेश में सीधी भर्ती और अनुकंपा से भर्ती हुए 5000 तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के वेतन से फरवरी से नवंबर के बीच 500 करोड़ रुपए बचा लिए हैं।
जबकि इस दरम्यान यूपीएससी और पीएससी से भर्ती हुए अफसरों को शत प्रतिशत वेतन दिया। इस तरह प्रदेश में पहली बार अफसरों और कर्मचारियों की भर्ती के बाद वेतन निर्धारण में यह दोहरे मापदंड सामने आए हैं। वहीं, अखिल भारतीय सेवा और राज्य प्रशासनिक सेवा के अफसरों की नई भर्तियों के मामले में प्रोबेशनरी पीरिएड में भी 100 फीसदी भुगतान किया गया।
नए कर्मचारियों के मामले में अगले दो साल में इसी तरह सेलरी कट कर 1000 करोड़ रुपए बचाए जाने की योजना हैं। सरकार के इस फैसले से नई भर्ती से आए कर्मचारियों में नाराजगी हैं।
इस से पहले कोरोना के चलते केंद्र के बाद राज्य सरकार कर्मचारियों का जुलाई 2021 तक पहले से ही कर्मचारियों का डीए पर रोक लगा चुकी हैं। इससे कर्मचारियों को हर महीने 5 हजार तो अफसरों को 10 हजार रुपए का नुकसान हो रहा हैं।