आ गए अच्छे दिन! अब मोदी सरकार बेचने जा रहीं है भारत पेट्रोलियम समेत यह 5 सरकारी कंपनियां, करोड़ो लोगों का रोज़गार खतरे में 

नई दिल्ली / खाईद जौहर – मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही अर्थव्यवस्था एक बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। ये चुनौती आज भी कायम हैं। पूरा देश मंदी के बेहद ख़राब दौर से गुज़र रहा हैं। देश की GDP निचले स्तर पर हैं। लाखों लोग आए दिन अपना रोज़गार खो रहे हैं। लेकिन मोदी सरकार कुछ भी कर पाने में आसफल हैं। हालांकि मोदी सरकार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की बहुत कोशिश करी, लेकिन सरकार की कोई भी कोशिश काम नहीं आई। 

इसी बीच आर्थिक मामलों से जुड़ी कैबिनेट कमेटी की बैठक में सरकार ने बेहद अहम फैसला लिया हैं। इस फ़ैसले के तहत मोदी सरकार पांच सरकारी कंपनियों को पूरी तरह बेचने जा रहीं हैं। मोदी सरकार कुछ कंपनियों की हिस्सेदारी पूरी तरह से बेचेंगी, तो कुछ की हिस्सेदारी अपने पास रखेगी। 

बता दे कि भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड का नाम इसमें सबसे ऊपर और अहम हैं। सरकार ने इस कंपनी में अपनी बाकी बची 53.29 फ़ीसदी हिस्सेदारी को पूरी तरह बेचने का फैसला किया हैं। इसके साथ ही कंपनी का प्रबंधन और मालिकाना हक भी सरकार के नियंत्रण से बाहर होकर इसे खरीदने वाली निजी कंपनी के हाथों में चला जाएगा। 

इसके अलावा शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया और रेलवे से जुड़ी कंपनी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की भी हिस्सेदारी बेचने का फैसला ले लिया हैं। सरकार ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में अपनी बाकी बची 63.75 फ़ीसदी हिस्सेदारी बेचने का और कंपनी को निजी हाथों में सौंपने का फैसला लिया हैं। जबकि सरकार रेलवे से जुडी कंपनी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की महज़ कुछ हिस्सा बेच कर 24 फ़ीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखेगी। 

जानकारी के अनुसार, 2 बिजली उत्पादन के क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाली कंपनियों को सरकार की एक बड़ी कंपनी एनटीपीसी खरीदेगी। इन दो कंपनियों में टिहरी हाइडल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड और नॉर्थ ईस्टर्न पावर कॉरपोरेशन शामिल हैं। इसके अलावा असम के नुमालीगढ़ में स्थित कंपनी के रिफाइनरी को नहीं बेचा जाएगा। इस रिफाइनरी को किसी अन्य सरकारी कम्पनी को सौंप दिया जाएगा। कम्पनी को बेचने के लिए नीलामी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 

मोदी सरकार को उम्मीद है कि इन पांचों कंपनियों को अगले साल मार्च के अंत तक बेचने का काम पूरा कर लिया जाएगा। हालांकि अब तक यह साफ नहीं है कि इन कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों का भविष्य क्या होगा ?

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