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परीक्षाएं नहीं, डिग्री नहीं….MP में 5400 डॉक्टरों की कमी, 200 अस्पताल ऐसे, जहां एक भी डॉक्टर नहीं

  • डॉक्टरों की कमी का हाल अब भी मप्र में कायम 
  • रोजगार पोर्टल पर 1501 डॉक्टरों ने लंबे समय से करा रखा है रजिस्ट्रेशन 
  • एमडी या एमएस की डिग्री लिए हुए है, फिर भी उन्हें नौकरी नहीं 
  • यदि प्रदेश में आया फिर कोई बड़ा संकट, तो कैसे निकलेगा इसका हल 

भोपाल/खाईद जौहर : मध्यप्रदेश में 5400 डॉक्टरों की कमी है। इसकी बड़ी वजह है- मेडिकल कॉलेज और आयुष कॉलेजों की परीक्षाएं समय पर न होना। यदि परीक्षाएं समय पर हो जातीं तो 5400 नए डॉक्टर मिल जाते। 15 प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों के फाइनल ईयर के 2400 और आयुष के 3000 से ज्यादा स्टूडेंट्स की डिग्री अटकी हुई है। 

हैरान करने वाली बात ये है कि प्रदेश के 200 अस्पताल ऐसे हैं, जहां एक भी डॉक्टर नहीं हैं। लेकिन, मध्यप्रदेश सरकार के रोजगार पोर्टल पर 1501 डॉक्टरों ने लंबे समय से रजिस्ट्रेशन करा रखा है, लेकिन उन्हें अब तक सरकारी नौकरी नहीं मिली। हालांकि, सरकार तीसरी लहर में डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए एमपी पीएससी और एनएचएम के जरिए खाली पदों को भरने की कोशिश कर रही है।

वहीं, पोर्टल में रजिस्टर्ड डॉक्टरों के क्वालिफिकेशन की पड़ताल में पता चला कि इन डॉक्टरों ने एमडी, एमएस, एमबीबीएस, बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस और बीडीएस कर रखा है। इनमें 512 ऐसे हैं, जो एमडी या एमएस की डिग्री लिए हुए हैं, फिर भी उन्हें नौकरी नहीं मिल रही। 

इधर, इस पुरे मामले पर आयुष मेडिकल एसोसिएशन के राष्ट्रीय प्रवक्ता – डॉ. राकेश पाण्डेय का कहना है कि कोरोना बचाव की व्यवस्था कराकर परीक्षाएं कराई जा सकती थीं। जिम्मेदारों ने इसमें लापरवाही की इस कारण परीक्षा में देरी हुई है। अगर समय पर परीक्षाएं होती तो 3000 से ज्यादा नए आयुष डॉक्टर अभी तैयार हो गए होते। 

मिली जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉक्टरों की भर्ती कर रहा है। इंटरव्यू होने के बाद भी डॉक्टर नहीं मिल पा रहे हैं। इसकी अहम वजह डॉक्टरों को सरकारी पॉलिसी पसंद नहीं आना है। डॉक्टरों को 2016 वेतनमान, प्रमोशन और पेंशन योजना का लाभ नहीं मिलता है। इसलिए योग्य डॉक्टर निजी अस्पतालों को प्राथमिकता दे देते हैं।

गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश में जिस रफ्तार से मरीज बढ़ रहे थे, उन्हें संभालने के लिए डॉक्टर कम पड़ गए थे। 30 कोविड मरीजों पर दो जूनियर डॉक्टर थे। डॉक्टरों की कमी का ये हाल अब भी बना हुआ है। प्रदेश में इस समय डेंगू, वायरल फीवर का कहर बना हुआ है, हर रोज़ इसके नए मरीज़ सामने आ रहे है। इसके अलावा अपनी मांगों को लेकर जूनियर डॉक्टर्स कभी भी हड़ताल पर चले जाते है जिसके कारण मरीज़ो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। 

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