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वितमंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कैसे आत्मनिर्भर बनेगा भारत

भोपाल डेस्क 

कल यानि की मंगलवार को पीएम नरेन्द्र मोदी ने 20 लाख के राहत पैकेज का एलान किया था। साथ ही उन्होंने बताया था कि हमे स्वदेशी अपनाना होगा ताकि हमारे यहाँ ज्यादा से ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग हो और हम आत्मनिर्भर बन पाए। उन्होंने कहा था कि इस पैकेज का इस्तेमाल कैसे होगा और कब किया जाएगा इसकी जानकारी आपको वित्तमंत्री देंगी।

तो आज वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया है कि कैसे हम आत्मनिर्भर बनेंगे और इस पैकेज का इस्तेमाल किस तरीके से किया जाएगा। चर्चा के दौरान वित्म्मंत्री ने बताया कि समाज के सभी वर्ग के लोगों से चर्चा करने के बाद हमने कुछ नियम बनाये हैं जिससे घरेलु  व्यापार को ज्यादा से ज्यादा फायदा दिया जा सके।

ऐसे आत्मनिर्भर बनेगा भारत 

  • वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि मध्यम, सूक्ष्म, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और घरेलू उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ कि हड्डी हैं । इन व्यापारों को 3 लाख करोड़ रुपए का कोलेट्रल फ्री ऑटोमैटिक लोन दिया जाएगा। इस लोन आपको किसी प्रकार कि गारंटी नहीं देनी होगी और नाही कोई कोलेटरल देना होगा। इसकी समय सीमा 4 वर्ष होगी और पहले 1 साल मूलधन नहीं चुकाना होगा। 
  • आकार और क्षमता को बढ़ाने की सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं तो उसके लिए फंड्स ऑफ फंड्स का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का इक्विटी इन्फ्यूज़न होगा। 
  • 25लाख से लेकर 1करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट कर जो 5करोड़ तक का व्यापार करेगा माइक्रो यूनिट कहलाएगा। स्मॉल के लिए 10करोड़ तक का निवेश और 50करोड़ तक का कारोबार और मीडियम में 20करोड़ तक का निवेश और 100करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है। 
  • 200 करोड़ से कम वाले में ग्लोबल टेंडर नहीं होंगे। इससे लघु ,सूक्ष्म, मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा। आत्मनिर्भर भारत की तरफ ये एक और कदम है।
  • प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज में एक सुविधा दी गई थी कि 12-12% EPF कर्मचारी और नौकरी देने वाले को भारत सरकार देगी ये पहले तीन महीनों के लिए किया गया था जिसे बढ़ाकर अगले तीन महीने जून, जुलाई और अगस्त तक कर दिया गया है। 

उन्होंने कहा कि आत्मानिर्भर भारत का मतलब यह नहीं है कि भारत को एक अलगाववादी देश होना चाहिए। हमारे पास जो गरीबों, जरूरतमंदों, प्रवासियों, दिव्यांगों और देश के वृद्धों के प्रति जो जिम्मेदारी है उसे हम नहीं भूलेंगे। 

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