मौसम जनित बीमारी ने खोली शिवराज सरकार की पोल,36 बेड के बच्चों के आईसीयू में 90 भर्ती, फर्श पर भर्ती करने की नौबत

मौसम जनित बीमारी ने खोली शिवराज सरकार की पोल,36 बेड के बच्चों के आईसीयू में 90 भर्ती, फर्श पर भर्ती करने की नौबत

 

 ग्वालियर/गरिमा श्रीवास्तव:- मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर जहां एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे करती है वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन के इस बड़े दावों की पोल मौसम जनित बीमारियों में खोल दी है.

 प्रदेश में वायरल के साथ-साथ डेंगू तेजी से फैल रहा है. ग्वालियर जिले में इसका असर बच्चों पर तेजी से हो रहा है.

 जिले के सबसे बड़े अस्पताल कमलाराजा अस्पताल में बच्चों के आईसीयू का बेड बढ़ाया गया था. पूर्व में आईसीयू में 16 दिन थे लेकिन फिर इसे 36 बेड किया गया था. पर बेड बढ़ाने के बाद भी एक बेड पर चार चार बच्चों को भर्ती करने की नौबत आ गई है.

 रविवार की रात इस आईसीयू में 90 बच्चे भर्ती थे.

 जमीन पर गद्दे बिछाकर भर्ती करने को मजबूर:-

अस्पताल में जहां एक बेड पर 3 से 4 बच्चे भर्ती है वही हालात ऐसे हैं कि जमीन पर गद्दे बिछाकर बच्चों को भर्ती करने की नौबत आ गई है. रविवार रात दो बच्चों को इस अस्पताल में जमीन पर गद्दा बिछाकर भर्ती किया गया.

 यही हालात वार्डों की है बच्चों के निजी अस्पताल में बेड फुल हैं. पीडियाट्रिक के विभागाध्यक्ष डॉ अजय गौड़ ने कहा कि हमारे पास चाहे सीमित संसाधन है लेकिन बच्चों को उचित इलाज दिया जा रहा है.

 जीआरएमसी के डीन ने बताया कि वायरस की जांच किट उपलब्ध कराने के लिए सरकार को पत्र लिखा गया है.

 जांच किट सिर्फ पत्र तक ही सीमित:

 शासन को जांच किट के लिए पत्र लिखा गया है लेकिन अभी तक स्थिति जस की तस है.बच्चों को कौन सा वायरस है इसकी जांच भी शुरू नहीं हुई है. उत्तर प्रदेश के करीबी जिलों में डेंगू और विशेष तरह की वायरस की वजह से 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. और इनमें सबसे ज्यादा बच्चे ही हैं. ग्वालियर में इटावा और उसके आसपास के क्षेत्र के बच्चे इलाज के लिए आ रहे हैं. इनमें से कई बच्चे डेंगू के भी मरीज हैं.

 पर पत्र लिखने के बाद भी अभी तक शासन की तरफ से जांच किट की व्यवस्था नहीं कराई गई है.

 सीएम शिवराज जनदर्शन में मशगूल, अस्पतालों में मर रहे बच्चे

 एक तरफ जहां अस्पतालों की यह स्थिति है वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान चुनावी क्षेत्रों में जनदर्शन कार्यक्रम में मशगूल है. ऐसा जान पड़ता है कि उन्हें चुनाव के आगे और कुछ दिखाई नहीं दे रहा. आगे देखना होगा कि कब तक जांच किट की व्यवस्था हो पाती है.

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