कमलनाथ ने किया महिला प्राध्यापकों के साथ अन्याय ! अब उन्हें शिवराज से उम्मीद…… !

Bhopal Desk:- 29 अप्रैल को  उच्च न्यायालय(High Court) द्वारा याचिका क्रमांक Wp/19630/2019 में अंतिम निर्णय देते हुए स्पष्ट किया गया है कि आरक्षित वर्ग की उन 91 महिला सहायक प्राध्यापकों को नियुक्ति से वंचित करके माननीय उच्च न्यायालय द्वारा उक्त महिलाओं को दिनांक 17/10/2019 को दी गई अंतरिम राहत के आदेश की भी अवहेलना की गई। गौरतलब है कि मेरिट की इन महिलाओं को पहले विभाग ने न्यायालय का हवाला देकर चॉइस फिलिंग(ChoiceFilling) की प्रक्रिया से रोका था। न्यायालय के आदेश का स्पष्टीकरण होने के बावजूद इन्हे नियुक्ति से वंचित कर दिया।  मध्य प्रदेश की कमलनाथ (Kamalnath)सरकार ने सहायक प्राध्यापकों के आंदोलन के चलते बिना सोचे समझे  91सीट होल्ड करने की बजाये 91मेरिट में चयनित  महिलाओं को रोका जो सरासर अन्याय था जब शासन प्रशासन से इन मेरिट की महिलाओं ने गुहार लगाई तो कहा गया कि हमसे गलती हो गई आप 91मेरिट की लड़कियों को रोक दिया किन्तु कोर्ट का निर्णय आते ही 24घंटे के अंदर आपको ज्वाइनिग दे दी जायेगी क्योंकि आपके नियुकित पत्र तैयार है। पाच माह बीत चुके है जबकि मेरिट की 91 महिलाएं आज भी नियुक्ति के लिए भटक रही हैं।

अब न्यायालय ने अंतिम निर्णय में साफ कर दिया है कि इन्हे अविलंब नियुक्ति दी जाए । अब देखना है कि पिछली सरकार के अन्याय से आहत ये महिला प्राध्यापक सामाजिक आर्थिक एवं मानसिक प्रताड़ना झेल रहीं है वर्तमान सरकार उनके साथ न्याय करती है या नहीं। सीएम शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh chauhan)से उम्मीद है कि वे पिछली सरकार की इस भयंकर भूल को सुधारकर  इन्हे नियुक्ति देंगे। 91मेरिट की महिलाओं द्वारा परिस्थिति को देखते हुये सुप्रीम कोर्ट में कैविएट लगायी गई है।

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