"India" के छात्रों के लिए "Buses", और "भारत" के मजदूरों के लिए "लाठियां", आखिर क्यों?
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Bhopal Desk:Garima Srivastav
उत्तर प्रदेश सरकार ने कोटा से मेडिकल और इंजीनियरिंग छात्र छात्राओं को वापस बुलाने के लिए 250 बसें भेजे हैं. वहीं देश के कई कोनों में लाखों मजदूर दर दर की ठोकर खा रहे हैं. उन पर लाठियां बरसाई जा रही हैं.
दिल्ली में यमुना किनारे ब्रिज के नीचे पड़े सैकड़ों मजदूरों स्थिति बेहद बदतर थी. उन्हें एक वक्त का खाना भी गुरुद्वारे से मिलता था. हालांकि जब यह सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो अरविंद केजरीवाल की नजर मजदूरों पर पड़ी की गई थी. उसके बाद उन्हें वहां से शिफ्ट किया गया पर अभी तक यह पता नहीं चल पाया कि मजदूरों को कहां शिफ्ट किया गया. इस लॉक डाउन के दौर में दिहाड़ी मजदूरों की हालत सबसे खराब हो गई है. उन्हें इतना भी नहीं पता होता है कि अगले वक्त खाना नसीब होगा भी या नहीं.
पर अमीरों के बच्चों को वापस बुलाने के लिए बस भेजे जा रहे हैं. हालांकि योगी सरकार ने मजदूरों को भी दिल्ली उत्तर प्रदेश बॉर्डर से वापस बुलाने के लिए बस भेजे थे. पर मजदूर सिर्फ दिल्ली में ही तो नहीं फंसे हैं ना.
अमीरों ने सरकार से पत्राचार किया होगा तो उनके बच्चे वापस आ रहे हैं पर दिहाड़ी मजदूरों का क्या?
उन्हें तो यह भी नहीं पता होगा कि सरकार तक बात पहुंचाने का क्या जरिया है.



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