
शिवराज सरकार का नया चमत्कार ,राजनैतिक रैली और प्रचार में यहां नहीं फ़ैलता कोरोना बाक़ी सब राम भरोसे
गणेश जी घरों में विराजे लेकिन पंडालों में हो रही राजनैतिक सभाये
द लोकनीति डेस्क भोपाल
बड़ा सवाल -क्या राजनीति बड़ी या जनता की जान ??
मध्यप्रदेश में जहां 50 हजार से अधिक कोरोना के मामले सामने आ चुके है ,वही मौतों का आँकड़ा 1200 के क़रीब पहुंच चुका है।
उसी प्रदेश में 22,23 औऱ 24 अगस्त को तीन दिन तक चलने वाले संभाग स्तरीय सदस्यता ग्रहण समारोह की शुरुआत ग्वालियर में आज हो गई है ।
इस कार्यक्रम में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ,राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हुए।
एकतरफ गृह मंत्रालय कोविड-19 को लेकर एडवाइजरी जारी करता है जिसमें संपूर्ण देश में गणेश चतुर्थी पर किसी भी प्रकार की भीड़ या पंडाल नहीं लगाने की सख्त हिदायत दी है। आदेश में साफ़-साफ कहा गया है कि कहीं पर भी 5 लोगों से ज्यादा की भीड़ यदि पाई गई तो उनके ऊपर दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी। मध्यप्रदेश में उन्हीं की सरकार के दिग्गज नेता गृह मंत्रालय के आदेशों की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे है। देखा जाए तो राजनीतिक पार्टियों ने अपने आप को भगवान से बड़ा समझ रहे हैं।
…. सरकार जो बचानी है “सरकार को “
प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान को जनता की जान से कोई सरोकार नहीं है उन्हें तो चिंता इस बात की है 27 सीटों में होने वाले उपचुनाव को कैसे जीता जाए और अपनी सरकार बचाई जाये। ग्वालियर में केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के दिग्गज नेताओ के साथ पंडाल में भीड़ को संबोधित कर जनता को यही संदेश दे रहे है कि कोरोना सिर्फ़ जनता के लिए है राजनीति में नहीं। ग्वालियर में हो रहे कार्यक्रम में वही मुहावरा फिट बैठता है कि “सैंया भये कोतवाल तो डर काहे का “ कहने का मतलब प्रदेश में कोरोना तो है लेकिन जब सरकार हम ही हैं तो हमसे सवाल पूछने वाला “माई का लाल” कौन है
तभी तो साहब सिंधिया के ग्वालियर में दहाड़ दे रहें है :
मुख्यमंत्री अपने भाषण में महाराज सिंधिया की काँग्रेस से बगावत को लेकर सफ़ाई देते नज़र आये …..शायद जैसे शिवराज को भी मालूम है कि ग्वालियर की जनता सिंधिया की काँग्रेस से बगावत को लेकर नाराज़ है इसलिए उन्होंने मोतीलाल नेहरू, सुभाष चन्द्र बोस की तुलना सिंधिया से कर डाली कि ,कहा -उन्होंने भी कांग्रेस से बग़ावत की थी।
शिवराज को जनता की जान की क्यों नहीं है फ़िक्र ????
इतिहास में पहली बार औऱ ख़ासकर ग्वालियर में इस बार सिंधिया परिवार के किसी भी व्यक्ति का इतना विरोध देखने को नहीं मिला जितना आज महाराज को लेकर नारेबाजी हुई …उनके खिलाफ जनता ने “go back”के नारे भी लगा दिए ….
ख़ैर राजनीति का खेल तो चलता ही रहेगा, लेकिन इसमें सोचने वाली बात यह है कि जहां एक ओर देश कोरोना की लड़ाई लड़ रहा है, वही मध्यप्रदेश के राजनेता अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी इस लड़ाई में आगे जनता को कितना खतरा होने वाला है यह तो आने वाला वक्त ही बतायेगा .…..क्योंकि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज औऱ उनकी सरकार ने WHO औऱ गृह मंत्रालय के आदेशों का पालन न करने की ठान ली है…
बहरहाल, जनता की जान राम राज्य में राम भरोसे ही नज़र आ रही है, क्योंकि हर किसी को बड़े नेताओं जैसे भोपाल के चिरायु अस्पताल जैसे बेहतर इलाज़ की व्यवस्था मध्यप्रदेश में तो नहीं हो पा रही हैं…..