म.प्र.- जनगणना में जोड़े गए नए सवाल, घर की फर्श,छत और दीवारों का क्या है सूरतेहाल

म.प्र.- जनगणना में जोड़े गए नए सवाल, घर की फर्श,छत और दीवारों का क्या है सूरतेहाल

पहले चरण की मतगणना  मई से होगी शुरू

जल्द तैनात होंगे अधिकारी
विभागीय अधिकारियों के अनुसार जल्दी ही गणना कर्मचारियों की ड्यूटी तय की जाएगी। जनगणना की प्रक्रिया में हर परिवार से मिलकर आंकड़े जुटाए जाएंगे। गणना कर्मचारी प्रत्येक घर व उसमें रहने वाले लोगों की सूची तैयार करने पहुंचेंगे। गणना के दौरान आंकड़े नीमच, जावद और मनासा जैसे ब्लॉक स्तर पर भी जुटाए जाएंगे। जिससे लोकसभा व विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में भी उपयोग हो सके।
31 सवालों का खाका हुआ है तैयार

11 सवाल परिवार से जुड़े
 1 परिवार के मुखिया का नाम
2 घर में कितने लोग हैं
3 क्या मुखिया अनुसूचित जातिए जनजाति या अन्य समुदाय से है। 
4 स्त्री-पुरुष की संख्या 
5 तृतीय लिंग की संख्या 
6 विवाहित दंपती कितने हैं 
7 कमरों की संख्या 
8 पेयजल का मुख्य स्रोत 
9 प्रकाश का मुख्य स्रोत 
10 शौचालय की सुलभता 
11 पेयजल की उपलब्धता।

5 सवाल शौंचालय और रसोई के
1 मकान में शौचालय है या नहीं
2 गंदे पानी की निकासी किससे जुड़ी है
3 स्नान घर है या नहीं
4 रसोई घर और एलपीजी,पीएनजी गैस कनेक्शन 
5 खाना पकाने के लिए प्रयुक्त मुख्य ईंधन

3 सवाल वाहन मोबाइल के होंगे
1 घर में वाहन के नाम पर साइकिल, स्कूटर, मोटर साइकिल, मोपेड में क्या है।
2 कोई कार, जीप, वैन है या नहीं 
3 मोबाइल नंबर ;जनगणना संबंधित संपर्क करने के लिए।

5 सवाल संचार माध्यम से जुड़े
1 घर में कोई रेडियो, ट्रांजिस्टर है या नहीं
2 क्या कोई टेलीविजन है
3 क्या इंटरनेट सुविधा है
4 लैपटॉप चलाते हैं या कम्प्यूटर
5 घर में कोई बेसिक टेलीफोन, मोबाइल फोन, स्मार्ट फोन में से कुछ है या नहीं
7 सवाल घर के बारे में
1 भवन संख्या 
2 मकान नंबर 
3 मकान की स्थिति 
4 मकान के फर्श दीवार और छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री
5 मकान का उपयोग 
6 मकान के स्वामित्व की स्थिति 
7 मकान का निर्माण किस उद्देश्य से हो रहा है।
पहली बार एनपीआर रजिस्टर 
2021 की जनगणना में पहली बार राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर ,एनपीआर बनेगा। जो कानून.व्यवस्था, लैंगिक समानता जैसे मुद्दों में मदद करेगा। 2010 में एनपीआर बना था। 2015 में अपडेट किया गया था।
ऐप पोर्टल से होगी निगरानी
एप पोर्टल से होगी निगरानी रू डेटा संकलन के लिए मोबाइल एप और निगरानी के लिए केंद्रीय पोर्टल का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे गणना का काम बेहतर तरीके से जल्दी निपटाया जा सकेगा। एप का बटन दबाते ही डेटा भेजा जा सकता है।

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