सिहोरा (हरगढ़) :- 4Mann यूरो बांड, फैक्ट्री ने हड़पी मजदूरों की मजदूरी, चल रहा है बड़ा खेल

जहां एक ओर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सरकार को इस कोरोना महामारी में मजदूरों के साथ खड़े होने का दावा कर रहे है,वही दूसरी ओर जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के हरगढ़ स्थित यूरो बांड-4 मान,मुख्यमंत्री जी के इसी बयान को धता बताते हुए,मजदूरों की मजदूरी न देकर उनके दावों की पोल खोल रही है |

सिहोरा (हरगढ़) में फोरमन यूरोबोंड इंडस्ट्री(4 Mann Euro bond industries),मैं काम करने वाले 200 मजदूरों को पिछले 2 महीने से मजदूरी नहीं दी गयी है,मजदूरों का आरोप है कि कंपनी द्वारा सांठ-गाँठ कर उनकी मजदूरी डकार ली गयी है |

साथ ही कंपनी साल भर अपने मुताबिक काम करवा मजदूरों का शोषण करती है,निष्पक्ष जांच होगी तो खुलेंगे अनेको राज

2008 में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हरगढ़ को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया था-

स्थानीय मजदूरों के मुताबिक यहां सन 2008 में मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज ने हरगढ़ को औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया था और सन 2010 में चार फैक्ट्रियों यहां लगी थी जिसमें (4 mann Eurobond industries जिसे यूरो बांड भी कहा जाता है) भी स्थापित हुई थी लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है न तो उन्हें यहां खासा रोजगार का अवसर मिला और मजदूरों की दैनिक मजदूरी पर कॉन्ट्रैक्ट बेस पर रखा गया था उन्हें lock down से पहले और लॉक डाउन के बाद भी उनका मेहनताना मजदूरी नहीं मिली है!

मजदूरों का कहना है कि जब वे कंपनी के अधिकारियों से बात करते हैं तो साहब सीधे मुंह बात नहीं करते और कांट्रेक्टर का बहाना करके अपना पल्ला झाड़ देते हैं, ऐसे में जब सभी मजदूर कॉन्ट्रैक्टर से पैसे की बात करते हैं तो कांट्रेक्टर कंपनी के ऊपर डाल देते हैं

तो इसमें बड़ा सवाल यह है???

कि क्या इसमें कंपनी और ठेकेदार की मिलीभगत है??

क्यों कंपनी और ठेकेदार लीपापोती करते नजर आ रहे हैं???

15/5/2020 को सभी मजदूरों ने मिलकर सिहोरा SDM चंद्र प्रताप गोहिल को ज्ञापन दिया था-

फैक्ट्री के सभी मजदूरों ने मिलकर सिहोरा SDM चंद्र प्रताप गोहिल को इस सन्दर्भ में ज्ञापन भी दिया था,लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई है,अब आखिर मजबूरी से भरे यह मजदूर अपनी मजदूरी पाने के लिए जाएं तो जाएं किसके पास.??..

मजदूरो को धमका रहा है ठेकेदार चिरंजीव पटैल –

वहीँ दूसरी ओर कंपनी के कहने पर ठेकेदार चिरंजीव पटैल मजदूरों पर दवाब बना रहा है,मजदूर बता रहें हैं -ठेकेदार कहता हैं कि लिखित शिकायत वापस ले लो नहीं तो,अंजाम भुगतने तैयार रहो, किसी की मजदूरी नहीं मिलेंगी!!

“मेरी पत्नी पेट से हैं ,मेरे पास इतने भी पैसे नहीं कि मैं उसकी कोई जाँच या इलाज करा सकूँ ,

वहीँ जब हमारी द लोकनीति की टीम ने स्थानीय मजदूर से बात की तो वह उसने कहा- “मेरी पत्नी पेट से हैं ,मेरे पास इतने भी पैसे नहीं कि मैं उसकी कोई जाँच या इलाज करा सकूँ,खून की कमी होने के बावजूद मैं पत्नी को चाह कर भी खून नहीं दे सकता क्योंकि मुझे आगे भी मजदूरी करनी हैं,ऊपर से मेरे पिता जी को भी लकवा मार गया हैं ,

मैं अपने घर का इकलौता कमाने वाला हूँ…मैं क्या करूँ ….शायद मुझें फाँसी ही लगा लेनी चाहिए..

दूसरे मजदूर जो बिहार -औऱ उत्तर प्रदेश से आते हैं उन्होंने कहा -“हम यहाँ लॉक डाउन से फँस गए हैं औऱ ना हमें मज़दूरी मिल रही हैं .ना कोई ठोस जवाब…. हम अपने घर वालों को 1000 रुपये भी नहीं भेज पा रहें हैं !

यहां कोई भी जनप्रतिनिधि और अधिकारी उनकी इस समस्या और महामारी में साथ देने को तैयार नहीं है….

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