MP Mission 2023 : क्या अभी से भाजपा से पिछड़ गई कांग्रेस? जंग जीतने की होड़ में राजनीतिक दल 

भोपाल : मध्य प्रदेश में 2023 का विधानसभा चुनाव 2018 के मुकाबले में कई मायनों में आधुनिक तकनीकों के सहारे लड़ा जाना तय है। ऐसे में जिस तेजी के साथ बीजेपी अपने आपको संगठन और नई तकनीकों से लैस कर रही है उसके मुकाबले कांग्रेस पिछड़ती हुई नजर आ रही है। 

दरअसल, कांग्रेस के संगठन के लिहाज से 68 शहरी और ग्रामीण जिला इकाइयां है, लेकिन आलम यह कि पार्टी के पास खुद के सिर्फ 21 जिला कमेटियों के दफ्तर हैं। जबकि 19 जिलों में पार्टी दफ्तर के लिए कलेक्टर को आवेदन दिया गया है। जिस पर जिला प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। पार्टी के पास सिर्फ पांच ऐसी कमेटी हैं जिन्हें ज़मीन अलॉट है। ऐसे में पार्टी दफ्तरों को आधुनिक बनाने से पहले पार्टी की चिंता खुद के पार्टी दफ्तर बनाने को लेकर है। 

वहीं, दूसरी तरफ भाजपा की बात करें तो अगले 1 साल में पूरे प्रदेश में अपने को संगठन स्तर पर मजबूत बनाने के लिए पार्टी अपने दफ्तरों को आधुनिक बनाने की तैयारी में है। उसने तय किया है अगले एक साल में सभी पार्टी दफ्तर आधुनिक सेवाओं से लैस होंगे। पार्टी ने अब तय किया है कि सभी जिला दफ्तरों को ई लाइब्रेरी से जोड़ा जाएगा। वो अपने सभी दफ्तरों को पेपर लेस बनाएगी। यानि सारा काम कम्प्यूटर पर होगा। 

प्रदेश में जहां भी किराये के भवन में दफ्तर है वहां पार्टी अब अपना भवन बनएगी, ताकि भोपाल में बैठकर सभी संगठन वाले जिलों और मंडल स्तर तक पार्टी इकाइयों से जोड़ा जा सके और पार्टी गतिविधियों को गति दी जा सके। 

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में 2023 में विधानसभा चुनाव है। जिसको लेकर अभी से इसकी तैयारियां तेज़ हो चली है। चुनाव मैदान से लेकर सोशल मीडिया तक प्रमुख राजनीतिक दल बीजेपी से जंग जीतने की होड़ है। वहीं, बीजेपी ने अगले एक साल में खुद को आधुनिक सेवाओं से जोड़ने का प्लान तैयार कर लिया है। लेकिन फिलहाल कांग्रेस इसमें पिछड़ती दिख रही है। 

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