
भोपाल : मध्यप्रदेश पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में “सुप्रीम सुनवाई” हुई। इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को बड़ा आदेश देते हुए कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव में OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के लिए आरक्षण में ट्रिपल टेस्ट नियम का पालन करना होगा। कोर्ट ने कहा कि चूंकि अध्यादेश खत्म हो गया है और चुनाव रद्द हो गए हैं, इसलिए इस संदर्भ में दाखिल याचिकाएं निष्प्रभावी हो चुकी हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहा गया है कि प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव में ट्रिपल टेस्ट लागू करने के लिए राज्य स्तरीय आयोग के गठन की स्थापना करने का उल्लेख है। यह आयोग इस वर्ग की आबादी की गणना कर सिफारिश सरकार को देगा। इसके आधार पर आरक्षण तय किया जाएगा। यदि सुप्रीम कोर्ट के ट्रिपल टेस्ट नियम को देखें तो कुल आरक्षण 50% से ज्यादा नहीं हो सकता है। इस हिसाब से OBC के लिए 15% सीटें रिजर्व हो सकती है। इस लिमिट को पार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की अनुमति लेना होगी।
बता दे कि शिवराज सरकार प्रदेश की 51% आबादी को साधने के लिए स्थानीय निकाय चुनाव में OBC उम्मीदवारों के लिए 27% सीटें रिजर्व करने का ऐलान कर चुका है। वर्तमान में 15% सीटें SC, 20% ST सीटें रिजर्व हैं।
जानिए क्या है ट्रिपल टेस्ट?
- 1- राज्य के भीतर स्थानीय निकायों के रूप में पिछड़ेपन की प्रकृति और निहितार्थ की कठोर जांच करने के लिए एक आयोग की स्थापना।
- 2- आयोग की सिफारिशों के मुताबिक स्थानीय निकाय-वार प्रावधान किए जाने के लिए आवश्यक आरक्षण के अनुपात को निर्दिष्ट करना, ताकि अधिकता का भ्रम न हो।
- 3- किसी भी मामले में ऐसा आरक्षण अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग के पक्ष में आरक्षित कुल सीटों के कुल 50% से अधिक नहीं होगा।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 17 दिसंबर को पंचायत चुनाव में ओबीसी का रिजर्वेशन खत्म करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद मप्र पंचायत चुनाव निरस्त किए गए थे, लेकिन शिवराज सरकार ओबीसी आरक्षण को फिर से बहाल करने की मांग की और तर्क देते हुए कहा था कि ओबीसी आरक्षण की 51 प्रतिशत आबादी के हिसाब से 27 प्रतिशत आरक्षण देना न्याय संगत है।