जिनके ऊपर है सख्त कानून बनवाने की ज़िम्मेदारी,वो खुद है इतने बड़े दागी,कैसे मिलेगा न्याय ?

नई दिल्ली :- इस साल हुए लोकसभा चुनाव में पार्टियों ने 88 ऐसे उम्मीदवार उतारे, जिन पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मुकदमे चल रहे थे। भाजपा इसमें भी अव्वल रही। उसने ऐसे 15 उम्मीदवारों को टिकट दिया, इनमें से 10 जीतकर संसद में ही बैठे हैंदूसरे पायदान पर कांग्रेस थी, जिसने 9 ऐसे नेताओं को टिकट दिया, उनमें से 5 जीत गए। महिलाओं के खिलाफ अपराध के आरोपी 88 उम्मीदवारों में से 19 अभी लोकसभा में हैं। इनमें से तीन पर दुष्कर्म के आरोप हैं। 38 निर्दलीय उम्मीदवारों पर भी ऐसे मामले थे, लेकिन सब के सब चुनाव हार गए। ये आंकड़े 7928 उम्मीदवारों के शपथपत्रों के आधार पर तैयार हुई एडीआर की रिपोर्ट के मुताबिक हैं।


पांच साल के आंकड़ें क्या कहते है :-
पिछले पांच सालों में 29 राज्यों और 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव हुए। कुल 40,690 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें 443 उम्मीदवारों पर महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले थे। ऐसे सबसे ज्यादा 49 उम्मीदवार भाजपा के थे। कांग्रेस के ऐसे 41 प्रत्याशी थे। इन 443 उम्मीदवारों में से 63 विधायक बने। इनमें भाजपा के 13 और कांग्रेस के 14 विधायक हैं।
और जो 19 संसद में दुष्कर्म के मामले पर हल्ला बोल रहे है उन्हें न जाने अपने दिन कैसे याद नही आ रहे जब उन पर ये आरोप लगे और उसके बावजूद वो देश के संसद में बैठ गए। ये वही पार्टियां है जो बेटियों के सम्मान की बात बखूबी करती है लेकिन जहां सम्मान करने की बात आती है तो ये कुकर्मियों को ही राजा घोषित करने में बाज नही मानती।

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