मोदी सरकार की बढ़ सकती हैं मुश्किलें , उन्हीं के पूर्व अर्थशास्त्री खोल रहे हैं उनकी सारी पोल

हम आपको बता दें कि इसी साल के मई महीने में मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने मोदी सरकार से इस्तीफ़ा दे दिया था। एक तरीके से हम कह सकते हैं कि बीजेपी का पूरा बहीखाता सुब्रमण्यम के ही पास है। इस्तीफ़े के एक महीने बाद ही उन्होंने बीजेपी के सारे अर्थशास्त्र सामने निकालके रख दिए उन्होनें कहा कि भाजपा अपनी जीडीपी वृद्धि दर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है। 

उन्होंने भाजपा की सारा डाटा एक सेकंड में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया के सामने निकाल रखा उन्होनें बताया कि 2011-12 से 2016-17 के बीच भारत की जीडीपी की वास्तविक वृद्धि दर 4.5 फ़ीसदी थी लेकिन इसे मोदी सरकार ने आधिकारिक रूप से जनता को सात फ़ीसदी बताया था। 

हम आपको यह भी बता दें कि इससे पहले इसी साल 28 जनवरी को पीसी मोहनन ने नेशनल स्टैटिस्टिकल कमिशन यानी एनएससी से कार्यकारी अध्यक्ष से इस्तीफ़ा दे दिया था। पीसी मोहनन का इस्तीफा देने का कारण रोज़गार से जुड़े आँकड़ों के प्रकाशन में देरी करना था। और साथ ही यह भी बता दें कि मोहनन के साथ एनएससी की एक और सदस्य जे लक्ष्मी ने भी इस्तीफ़ा दे दिया था। मोहनन के इस्तीफ़े के तीन दिन बाद बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार में भारत में रोज़गार के आँकड़े लीक हो गए थे और इससे पता चला था कि बेरोज़गारी की दर बढ़कर 6.1 फ़ीसदी हो गई है और यह पिछले 45 सालों में सबसे उच्चतम स्तर पर आ गई है। 

चलिए अब हम आपको बताते हैं की आखिर एनएससी है क्या?
 एनएससी केंद्र सरकार की संस्था है जो भारत के अहम आँकड़ों की गुणवत्ता की जाँच करती है।
 इससे हमें यह तो साफ़ साफ़ समझ आ रहा है की मोहनन देश को वो सारा डाटा बता सकते हैं जिससे सच सामने आए। और एनएससी के आकड़ों से तो साफ साफ यह पता लग रहा है कि बीजेपी ने जो डाटा जनता को दिखाया है वो गलत डाटा है।   

वैसे बेरोजगारी का यह आकड़ां चुनाव से पहले आ गया था तो जाहिर सी बात है की यह आकड़ां मोदी सरकार के लिए घातक साबित ही सकता है। और उस समय मोदी सरकार का वह पहला कार्यालय था हालांकि मोदी सरकार ने बेरोज़गारी के आंकड़ों को खारिज कर दिया और मोदीओ सरकार ने यह आरोप लगाया कि डेटा संग्रह करने की प्रक्रिया में कई तरह के दोष हैं और यह असली तस्वीर नहीं है। 

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